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पलामू: प्रमंडलीय सदर अस्पताल में चिकित्सक की लापरवाही, प्रसूता व बच्चे की मौत, स्वास्थ्य मंत्री ने दिया जांच का आदेश

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Palamu: सरकार लाखों रुपये खर्च कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करती है, लेकिन धरातल की सच्चाई कोसों दूर रहती है. क्वालिटी स्वास्थ्य सेवा नहीं मिलने और चिकित्सकों की लापरवाही से रोगियों की असमय मौत हो जाती है.

पलामू प्रमंडलीय मेदिनीनगर सदर अस्पताल में कुछ इसी तरह की घटना सामने आयी है. परिजनों के अनुसार सदर अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत हो गयी.

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क्या है पूरा मामला? 

दरअसल, सदर अस्पताल में शुक्रवार की रात पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भड़गावा के अमित कुमार की पत्नी और उसके नवजात बच्चे की मौत अस्पताल में चिकित्सक कर्मियों की लापरवाही की वजह से हो गयी.

भुक्तभोगी अमित कुमार के मित्र संतोष कुमार ने बताया कि गुरुवार की रात अमित अपनी पत्नी को डिलीवरी के लिए सदर अस्पताल लेकर गया था. इस बीच चिकित्सकों ने जांच कर कहा कि बच्चा जन्म होने में अभी डेढ़ महीना बाकी है.

इसके बाद अमित अपने पत्नी को घर ले गया. दूसरे दिन शुक्रवार को फिर से गुड़िया के पेट में अचानक दर्द होने लगा. तभी अमित तुरन्त उसे लेकर इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचा.

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मरीज के रेफर करने की दी धमकी 

मरीज को देखते ही डियूटी में तैनात चिकित्सक ने कहा कि अभी डेढ़ महीना बाकी है. इससे पहले इसे अस्पताल लेकर क्यों आ गये? अगर ज्यादा करोगे तो मरीज को रेफर कर देंगे. इस बात पर अमित अपने पत्नी को लेकर घर लौट गये.

रात होते ही अमित की पत्नी घर पर ही अपने बच्चे को जन्म दे दिया. लेकिन जन्म देने के बाद मां और बच्चा की हालत गंभीर हो गयी. आनन-फानन में अमित अपनी पत्नी और बच्चे को लेकर सदर अस्पताल पहुंचा, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉ राजीव नयन ने बच्चे और उसकी पत्नी को देखा तो दोनों मृत थे.

पुलिस ने शांत कराया मामला 

इसके बाद मरीज के परिजनों ने सदर अस्पताल में हल्ला हंगामा करने लगे. बाद में इसकी जानकारी पुलिस को दी गयी. पुलिस सदर अस्पताल पहुंची और मामले को शांत कराया. बताते चलें कि पिछले कई दिनों से अस्पताल में इस तरह के मामले आ चुके हैं. अस्पताल कर्मियों की लापरवाही के कारण मरीज काफी परेशान रहते हैं.

अस्पताल में लापरवाही की शिकायत है आम 

अस्पताल के मरीजों का कहना है कि अस्पताल में लापरवाही इतनी है कि अगर यहां मरीज मरता भी रहे तो उसे चिकित्सक नहीं देखने पहुंचते हैं.

महिला वार्ड के मरीजों के परिजनों ने बताया कि डिलीवरी के बाद यहां की एएनएम मुंह खोलकर मनमानी रकम मांगते हैं. कई बार तो पैसे के लेन-देन में मरीज के परिजन व एएनएम में तू-तू मैं-मैं भी हो चुका है.

क्या कहते हैं जिम्मेवार 

मामले की जांच करें, घटना की पुनरावृति ना हो-इसकी जवाबदेही सुनिश्चित करेंः स्वास्थ्य मंत्री

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचन्द्र चन्द्रवंशी से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़ा निर्देश दिया गया है. सदर अस्पताल में सारे साधन मुहैया कराये गए हैं. बावजूद ऐसी घटना सामने आ गयी है. मामले में पलामू के सिविल सर्जन से जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. घटना की पुनरावृति ना हो, इसकी जवाबदेही सुनिश्चित की जायेगी.

डिलेवरी के लायक नहीं थी महिलाः सीएस

पलामू के सिविल सर्जन डा. जाॅन एफ कनेडी ने बताया कि सेवन मंथ के डिलिवरी लायक महिला थी. महिला डिलेवरी लायक पोजेशिन में नहीं थी. उसकी स्थिति गंभीर बन गयी थी. अल्ट्रासाउंड देखकर डाक्टर एसएस होरो ने मरीज का इलाज किया था. सारे रिपोर्ट बता रहे थे कि महिला की डिलेवरी डेढ़ से दो महीने बाद होगी. महिला अपने घर चली गयी. वहीं उसके साथ क्या हुआ कुछ कहा नहीं जा सकता. जच्चा-बच्चा की मौत होना दुखद घटना है.

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