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शहर के अधिकतर मॉड्यूलर टॉयलेट में पानी नहीं, लोग नहीं कर पा रहे इस्तेमाल

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Ranchi : स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की तैयारी से पहले बने मॉड्यूलर टॉयलेट का रखरखाव नहीं होने से एक बार फिर रांची नगर निगम की लापरवाही सामने आयी है. पहले के सर्वेक्षण के तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मॉड्यूलर टॉयलेट बनाये गये थे. टॉयलेट को बनाने के बाद निगम ने यह दावा किया था कि इन मॉड्यूलर टॉयलेट के होने से लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी. आज उसी मॉड्यूलर टॉयलेट में पानी नहीं रहने से लोगों को परेशानी झेलने पड़ रही है. उपनगर आयुक्त संजय कुमार का कहना है कि जल्द ही इस पर एक समीक्षा बैठक की जानी है. टॉयलेट के रखरखाव का काम देखनेवाली कंपनी पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.

नहीं होती टॉयलेट की सफाई, इस्तेमाल से कतराते हैं लोग

मालूम हो कि राजधानी को स्वच्छता की पटरी पर लाने के लिए 88 लाख रुपये खर्च कर कुल 80 मॉड्यूलर टॉयलेट का निर्माण कराया गया था. आज इसकी स्थिति यह है कि रातू रोड से हटिया, नामकुम से चुटिया, कांटोटोली से पिस्का मोड़ चौक के बीच बने अधिकतर टॉयलेट्स में पानी नहीं है. कई टॉयलेट्स में पेन, पानी पाइप, बेसिन, नल, फर्श, टंकी टूटने के कगार पर हैं. कई टॉयलेट्स में महीनों से सफाई नहीं की गयी है, जिसके कारण टॉयलेट उपयोग के लायक नहीं रह गया है. नागाबाबा खटाल,  हरमू बायपास, नगर निगम के समीप,  सिरमटोली चौक,  रातू रोड चौक,  हरमू, कार्तिक उरांव चौक के आस-पास के मॉड्यूलर टॉयलेट्स के बाहर गंदा पानी भी लगातार बहता रहता है. कई इलाकों में पानी भी जमा हुआ है.

आम आदमी को कम, कंपनी को मिल रहा ज्यादा लाभ

जानकारी के मुताबिक, रांची नगर निगम की तरफ से एक मॉड्यूलर टॉयलेट पर करीब 1.10 लाख रुपये खर्च किये गये थे. ऐसे में कुल 80 मॉड्यूलर टॉयलेट में करीब 88 लाख रुपये की राशि खर्च की गयी. इसके बावजूद इनके रखरखाव में लापरवाही बरतने के कारण इनकी उपयोगिता आज 20 प्रतिशत हो गयी है. इन टॉयलेट्स के रखरखाव की जिम्मेदारी लेनेवाली कंपनी को नगर निगम लाखों रुपये दे रहा है. हकीकत यह है कि इन मॉड्यूलर टॉयलेट्स का फायदा आम आदमी को कम, कंपनी को अधिक पहुंच रहा है.

पानी के अभाव में दीवार बनी सहारा

स्थिति यह है कि इन मॉड्यूलर टॉयलेट्स में पानी के अभाव में लोग दीवार या फिर किसी कोने में पेशाब करते हैं. इतना ही नहीं, रात होने पर कई मॉड्यूलर टॉयलेट के आस-पास शौच करने की स्थिति भी नजर आती है. टॉयलेट्स के आस-पास से गुजरनेवाले लोगों का कहना है कि शायद ही यहां पानी रहता है. टॉयलेट्स की सबसे बड़ी परेशानी यहां सफाई नहीं होना है. जिन जगहों पर मॉड्यूलर टॉयलेट्स बने हैं, अधिकतर जगहों पर गंदा पानी सड़क पर बह रहा है.

ठेकेदार को किया गया है शोकॉज : उपनगर आयुक्त

मॉड्यूलर टॉयलेट्स की स्थिति को लेकर उपनगर आयुक्त संजय कुमार का कहना है कि टॉयलेट की स्थिति को लेकर जल्द ही समीक्षा बैठक की जानी है. शौचालय की तकनीक में बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है. ठेकेदार को शोकॉज किया गया है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कंपनी पर कार्रवाई की जायेगी.

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