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 अधिकतर आईएएस-आईपीएस अपनी संपत्तियों का खुलासा नहीं करते,  डिफॉल्टर होने का भी भय नहीं

दो हजार से ज्यादा आईएएस-आईपीएस तो ऐसे हैं, जिन्होंने 2014 से लेकर 2017 तक के रिटर्न भी नहीं भरे है.

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NewDelhi :  देश के आईएएस-आईपीएस अफसर क्या कानून से उपर हैं? खबरों के अनुसार वे नियमानुसार अपनी संपत्तियों का खुलासा करने में कोताही बरत रहे हैं. बता दें कि अधिकतर अधिकारी अपनी संपत्तियों के आकलन से जुड़ा रिटर्न नहीं भर रहे हैं. जान लें कि अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के अफसरों के लिए हर साल रिटर्न भरने का नियम  बनाया गया है. अफसरों को जमीन,जायदाद और मकान आदि अचल संपत्ति का रिटर्न  भरना है. इसमें फेल होने पर विजलेंस क्लीयरेंस और प्रमोशन आदि के लाभ से वे वंचित हो सकते हैं. लेकिन  चेतावनियों को भी अफसर दरकिनार कर दे रहे. 2018 के लिए इम्मूवेबल प्रॉपर्टीज (अचल संपत्तियों) रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जनवरी है.

मगर अब तक साढ़े पांच हजार से ज्यादा आईएएस-आईपीएस अफसरों ने रिटर्न नहीं भरा है. अफसर अभी रिटर्न जमा कर खुद को डिफॉल्टर घोषित होने से बचा सकते हैं. मगर दो हजार से ज्यादा आईएएस-आईपीएस तो ऐसे हैं, जिन्होंने 2014 से लेकर 2017 तक के रिटर्न भी नहीं भरे हैंं.  डीओपीटी के नियमों के अनुसार इन अफसरों पर डिफॉल्टर होने का ठप्पा लग चुका हैं.

यूपी में अवैध खनन के मामले में चर्चित आईएएस अफसर बी चंद्रकला के ठिकानों पर जिस तरह से छापेमारी हुई तो अफसरों की काली कमाई का मामला फिर से बहस में आ गया है. एनडीटीवी के अनुसार जब केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में देश भर के आईएएस-आईपीएस अफसरों की ओर से दाखिल आईपीआर के आंकड़ों को खंगाल गया, तो पता चला कि सभी अफसर नियम-कायदे दरकिनार कर अपनी संपत्तियों का खुलासा नहीं कर रहे हैं.

3060 अफसरों ने रिटर्न दाखिल नहीं किया हैं.

बता दें कि 31 दिसंबर 2018 तक अर्जित अचल संपत्तियों के बारे में एक जनवरी से 31 जनवरी 2019 तक आईएएस अफसरों को रिटर्न भरना है. सिर्फ दस दिन बचे हैं, मगर अब तक लगभग पांच हजार आईएएस में से 3060 अफसरों ने रिटर्न नहीं दाखिल किया हैं. अगर तय तिथि के भीतर नहीं जमा करेंगे तो एक और मौका मिलेगा. इसके बाद डिफॉल्टर घोषित होंगे. मगर देश में सैकड़ों की संख्या में ऐसे आईएएस पड़े हैं, जो कि वर्ष 2014 से लेकर अपनी संपत्तियों की घोषणा नहीं कर रहे हैं. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग(डीओपीटी) के निर्धारित प्रोफार्मा पर वह सूचनाएं ही नहीं उपलब्ध करा रहे हैं. डीओपीटी  से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में अर्जित संपत्तियों का 1164 आईएएस अफसरों ने रिटर्न ही नहीं दाखिल किया. इसके अलावा 2015 का 1137 आईएएस ने ब्यौरा नहीं दिया.

इस बीच सरकार ने कुछ सख्ती बरती तो सुस्त पड़े आईएएस अफसरों ने प्रापर्टीज की जानकारी देनी शुरू की. फिर भी 592 आईएएस डिफॉल्टर रहे. इसी तरह 2017 के लिए 715 अफसरों ने संपत्तियों की जानकारी नहीं दी. इसमें यूपी के 86 आईएएस हैं. देश में 6396 पदों की तुलना में 4926 आईएएस कार्यरत हैं. जान लें कि देश में आईपीएस अफसरों के कुल 4802 आईपीएस अफसरों की पोस्ट है. जिसमें से 3894 आईपीएस कार्यरत हैं. अचल संपत्ति का रिटर्न भरने की बात करें तो वर्ष 2018 की अचल संपत्ति का ब्यौरा अब तक 2696 आईपीएस ने नहीं दिया हैं.

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