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झारखंड के धनाबद,गिरिडीह,गोड्डा,पाकुड़ और साहिबगंज में सबसे ज्यादा पशु तस्करी,पश्चिम बंगाल के रास्ते भेजे जाते हैं बांग्लादेश

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Ranchi : झारखंड में पशु तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रहा है. पूरे  झारखंड की बात करें तो धनाबद, गिरिडीह, गोड्डा,पाकुड़ और साहिबगंज में सबसे ज्यादा पशु तस्करी होती है. बंगाल और बिहार की सीमा से सटे होने के चलते पशु तस्कर इसका पूरा फायदा उठाते है. बिहार और बंगाल से सटे इन सभी जिले के थाना क्षेत्र पशु तस्करों के लिए सेफ जोन है. समय-समय पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सफलता भी प्राप्त की है, फिर भी पशुओं की तस्करी में कमी नहीं आ रही है. सारा खेल रात के अंधेरे में चलता है. पशु तस्करी में एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है. इनमें झारखंड, बिहार और बंगाल के तस्कर शामिल हैं. इन जिलों की पुलिस पशु तस्करी रोकने के नाम पर कभी-कभी कार्रवाई करके सिर्फ खानापूर्ति करने का काम करती है.

वाहन को पार कराने के लिए तस्कर के एजेंट करते है स्कॉट

पशु की तस्करी के लिए हाइवा ट्रक, कंटेनर का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि अन्य थाना क्षेत्र में पिकअप, 407 व अन्य छोटे वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे वाहन को पार कराने के लिए पहले से ही तस्कर के एजेंट बोलेरो, स्कार्पियो से स्काट करते हैं. रास्ता अगर क्लियर रहा तो रात के अंधेरे में पशु से लदे वाहन पार हो जाते हैं. वहीं जहां कम संख्या में पशु रहते है ऐसे वाहन अथवा पैदल ले जाने वाले के लिए मोटरसाइकिल से स्कॉट किया जाता है. अगर कहीं कोई मिल भी जाय तो कह दिया जाता है. पालने के लिए ले जाते है लेकिन ऐसे मामले में नहीं के बराबर होते हैं. ज्यादातर मामले तस्करी के ही रहे है.

जीटी रोड से बड़े पैमाने पर पशु को पश्चिम बंगाल भेजा जाता है

धनबाद जिले से गुजरनेवाले जीटी रोड से बड़े पैमाने पर पशु को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजने का धंधा चल रहा है. इसमें मवेशी तस्करों का बड़ा गिरोह काम कर रहा है. मिली जानकारी के अनुसार जानवरों की तस्करी का यह धंधा धनबाद जिले के जीटी रोड पर पड़नेवाले थानों की पुलिस की कमाई का बड़ा स्त्रोत बना हुआ है. हर दिन जानवर लदे 100 से अधिक ट्रक धनबाद जिले से जीटी रोड होकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करता है. पश्चिम बंगाल से फिर पशुओं को बांग्लादेश भेजा जाता है.

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झारखंड में हर वर्ष होती है  6 से 10 लाख पशुओं की तस्करी

आंकड़े के अनुसार जहां पूरे भारत में प्रतिवर्ष 50 लाख से अधिक पशुओं को तस्करी करके बांग्लादेश भेजा जाता है. वहीं झारखंड में प्रतिवर्ष 6 से 10 लाख पशुओं की तस्करी करके उसे बांग्लादेश भेजा जाता है. झारखंड में सबसे अधिक धनबाद,गिरिडीह पाकुड़ गोड्डा और साहिबगंज जिले में सबसे ज्यादा पशुओं की तस्करी का धंधा फल-फूल रहा है. मिली जानकारी के अनुसार यहां जिस पशु का दाम 3-4 हजार रुपया होता है, वहीं उस पशु का दाम बांग्लादेश में 60 हजार है.

2005 को झारखंड में गोवंश हत्या प्रतिषेध अधिनियम को दी गयी मंजूरी

22 नवंबर, 2005 को झारखंड में गोवंश हत्या प्रतिषेध अधिनियम को मंजूरी दी गयी. इस अधिनियम के तहत गाय-बैल को राज्य से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध है. एसपीसीए निरीक्षकों को अधिनियम के  प्रावधानों को लागू करना है. पशुओं पर क्रूरता करनेवालों के खिलाफ कोर्ट में प्रोसिक्यूशन भेजना है. स्थानीय थाना से सहयोग लेना है. एफआइआर के लिए थानों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके बावजूद गाय व बैल प्रतिदिन ट्रकों पर लादकर जीटी रोड से बांग्लादेश ले जाया जा रहा है.

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