न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

हर महीने एक लाख किलो से ज्यादा अनाज घोटाले की आशंका, मंत्री ने दिए जांच के आदेश

सचिव ने कहा- गलत है तो होगी कार्रवाई

461

Akshay Kumar Jha

Ranchi/Godda: झारखंड के माथे पर अभी कुछ महीनों पहले ही भूख से मौत की वजह से कलंक लगा था. राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड में पीडीएस सिस्टम और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठे थे. वजह कभी आधार कार्ड से राशन कार्ड का जुड़ना बताया गया, तो कभी कुछ और. लेकिन असली वजह है यहां सरकारी अनाज की बंदरबांट.

जिला स्तर पर ऊपर से लेकर नीचे तक पीडीएस सिस्टम चरमराया हुआ है. इसकी एक बानगी गोड्डा जिले में देखने को मिल रही है. गोड्डा जिले के सुंदर पहाड़ी में जो हो रहा है, उससे यह साबित होता है कि हर महीने यहां लाखों किलो अनाज की बंदरबांट हो रही है. सरकारी आंकलन है कि एक किलो चावल पर सरकार का करीब 30 रुपए खर्च होता है. इस हिसाब से सिर्फ गोड्डा जिले के सुंदर पहाड़ी में हर महीने 30 लाख से ज्यादा का खेल हो रहा है. क्या इतने बड़े पैमाने पर हो रहे खेल का जिले के अधिकारियों को पता नहीं.

एक प्रखंड में एक ही नाम के 100 के ज्यादा कार्डधारी

न्यूज विंग को जब इस गोरखधंधे के बारे में पता चला तो काफी रिसर्च किया गया. पीडीएस सिस्टम के जानकारों से बातचीत की गयी. रिसर्च और जानकारों की बात से ये साबित होता है कि गोड्डा में करोड़ों रुपए का खेल हो चुका है. गोड्डा के सुंदर पहाड़ी प्रखंड में एमओ कोटे से जो अनाज डाकिया योजना के तहत आदिम जनजाति लोगों को दिया जाना है, उसी योजना में खेल हो रहा है. न्यूज विंग ने aahar.jharkhand.gov.in पर जाकर इस प्रखंड के एमओ कोटे से बांटे जाने वाले अनाज के डाटा को इकट्ठा किया. मई, जुलाई अगस्त और अक्टूबर महीने के ऑनलाइन रिपोर्ट देखने के बाद जो बातें सामने आ रही है, वो चौंकाने वाली है.

रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे कई नाम है जो 100-200 बार है या फिर 50-100 बार हैं. हालांकि, राशन कार्ड नंबर को जांचने के बाद कार्डधारी का नाम सही मिलता है. लेकिन क्या संभव है कि एक ही नाम के 100 से ज्यादा आदिम जनजाति के लोग एक ही प्रखंड में हो. ऑनलाइन रिपोर्ट में हर महीने 4000 से ज्यादा आदिम जनजाति परिवारों को चावल और केरोसिन दिए जाने की रिपोर्ट है. सवाल उठता है कि क्या एक ही प्रखंड में 4000 से ज्यादा पहाड़िया जनजाति के परिवार होंगे.

जून महीने की रिपोर्ट

वामड़ी पहाड़ियाः 99 कार्डधारी, चांदी पहाड़ियाः 133 कार्डधारी, बामड़ा पहाड़ियाः 67, सुरजी पहाड़ियाः 204 कार्डधारी, सुरजा पहाड़ियाः 54 कार्डधारी, वैदी पहाड़ियाः 59, सोनी पहाड़ियाः 53 कार्डधारी, सीता पहाड़ियाः 36 कार्डधारी, रुपी पहाड़ियाः 40 कार्डधारी, रामी पहाड़ियाः 86 कार्डधारी, रामा पहाड़ियाः 83 कार्डधारी, नारा पहाड़ियाः 50 कार्डधारी, मंगली पहाड़ियाः 54 कार्डधारी, मैसी पहाड़ियाः 70 कार्डधारी, कमली पहाड़ियाः 38 कार्डधारी, कमू पहाड़ियाः 69 कार्डधारी, जोमी पहाड़ियाः 48 कार्डधारी, जोमे पहाड़ियाः 45 कार्डधारी, जामा पहाड़ियाः 62 कार्डधारी, जलिया पहाड़ियाः 41 कार्डधारी, जबड़ी पहाड़ियाः 43 कार्डधारी, जबड़ा पहाड़ियाः 30 कार्डधारी, धर्मी पहाड़ियाः 78 कार्डधारी, धर्मा पहाड़ियाः 34 कार्डधारी, देवी पहाड़ियाः 118 कार्डधारी, देवा पहाड़ियाः 54 कार्डधारी, चांदू पहाड़ियाः 40 कार्डधारी. इसमें ऐसे नाम नहीं जोड़े गए हैं, जिनकी संख्या 25 से कम हो.

silk_park

मंत्री ने डीसी को किया फोन, कहा -जांच कर के बताएं

इस बात की जानकारी न्यूज विंग ने खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय को दी. सारी डिटेल उन्हें दिखायी. सारी जानकारी लेने का बाद उन्होंने फौरन डीसी गोड्डा को फोन लगाया, उनसे मामले की जांच करने को कहा, साथ ही अपने विभाग के कर्मियों को भी मामले को गंभीरता से लेने और जांच करने का निर्देश दिया.

तेजी से हो रही है जांचः सचिव

खाद्य आपूर्ति के सचिव अमिताभ कौशल ने कहा कि मामले पर मंत्री जी से भी चर्चा हुई है. पहली नजर में मामला काफी गंभीर दिखायी देता है. सारा डेटाबेस हमारे पास है. जिले को भी निर्देश दिये गये हैं. अगर कहीं भी कोई अनियमितता या गड़बड़ी पायी जाती है, तो कार्रवाई होगी. किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

प्रशासन कर रहा जांचः डीसी

न्यूज विंग से बात करते हुए गोड्डा के डीसी किरण कुमारी पासी ने कहा कि पहाड़िया लोगों की संस्कृति होती है कि वो अपने पूर्वजों का नाम अपने संतान को दे देते हैं. लेकिन फिर भी प्रशासन ने इसे काफी गंभीरता से लिया है. मामले की जांच हो रही है. जल्द ही साफ हो जाएगा कि ऐसा संभव है या नहीं.

इसे भी पढ़ेंःलेबर कोर्ट पहुंचा इंडिकोन-वेस्टफालिया की बिक्री का मामला

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: