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तीन दशक से सांसदों, विधायकों पर चार हजार से ज्यादा आपराधिक मामले लंबित, SC का सत्र अदालतों के गठन का निर्देश

SC को सोमवार को सूचित किया गया  कि संसद और विधानसभाओं के वर्तमान और कुछ पूर्व सदस्यों के खिलाफ तीन दशक से भी अधिक समय से 4,122 आपराधिक मामले लंबित हैं

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NewDelhi : SC को सोमवार को सूचित किया गया  कि संसद और विधानसभाओं के वर्तमान और कुछ पूर्व सदस्यों के खिलाफ तीन दशक से भी अधिक समय से 4,122 आपराधिक मामले लंबित हैं. सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ एक जनहित याचिका पर वर्तमान और पूर्व विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रही है. बता दें कि SC ने राज्यों तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों से वर्तमान और पूर्व विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी थी,  जिससे ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई के लिए पर्याप्त संख्या में विशेष अदालतों का गठन संभव हो सके.  आपराधिक मामलों के आलेाक में SC ने पूर्व और वर्तमान सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए बिहार और केरल में सत्र अदालतों के गठन के निर्देश दिये हैं.

264 मामलों में उच्च न्यायालयों ने सुनवाई पर रोक लगा दी

जानकारी के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया और अधिवक्ता स्नेहा कालिता इस मामले में न्यायमित्र की भूमिका में हैं.  बजा दें कि उन्होंने राज्यों और उच्च न्यायालयों से प्राप्त डेटा SC में पेश किया. पेश किये गये डेटा के अनुसार 264 मामलों में उच्च न्यायालयों ने सुनवाई पर रोक लगा दी है.  जबकि 1991 से लंबित कई मामलों में तो आरोप तक तय नहीं किये गये हैं.  अधिवक्ता एवं भाजपा नेता अश्चिनी उपाध्याय की उस याचिका पर अदालत सुनवाई करेगी, जिसमें आपराधिक मामलों में दोषी सिद्ध नेताओं पर ताउम्र प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी है.  इस क्रम में SC निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े इस तरह के मामलों में तेज सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने पर भी विचार करेगा.

 

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