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इंजीनियरिंग से ज्यादा होटल मैनेजमेंट के छात्रों को मिल रहा है बेहतर प्लेसमेंट

चौंकानेवाले आंकड़े हैं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के आंकड़े

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Ranchi : देशभर में अब इंजीनियरिंग के स्नातकों से ज्यादा पूछ होटल मैनेजमेंट के छात्रों की हो रही है. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से संबद्ध पाठ्यक्रमों में अब होटल मैनेजमेंट का क्रेज बढ़ा है. परिषद की ओर से जारी किये गये आंकड़ों में कहा गया है कि इंजीनियरिंग के स्नातकों में से सिर्फ 40 फीसदी को ही समय पर रोजगार मिल रहा है.

2013-14 से 2016-17 तक की रिपोर्ट में किया गया खुलासा

इतना ही नहीं होटल मैनेजमेंट के 77 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को अपने पहले प्रयास में ही बेहतर नौकरी मिल रही है. परिषद की ओर से जारी 2013-14 से 2016-17 तक की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है. इसमें यह कहा गया है कि प्रत्येक वर्ष परिषद से संबद्ध होटल मैनेजमेंट के संस्थानों में से 7.04 लाख स्टूडेंट पास आउट होते हैं. इनमें से 4.20 लाख से अधिक स्टूडेंट्स को रोजगार के अवसर मिल जाते हैं. 56 प्रतिशत पास आउट को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर नौकरियां मिलने की बातें रिपोर्ट में कही गयी हैं.

आंकड़ों के मुताबिक होटल मैनेजमेंट संस्थानों का प्लेसमेंट सबसे अधिक

आंकड़ों के अनुसार होटल मैनेजमेंट संस्थानों का प्लेसमेंट सबसे अधिक है. दूसरे स्थान पर 56 प्रतिशत स्टूडेंट्स मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट से जुड़े हैं, जिन्हें रोजगार मिल रहा है. तीसरे स्थान पर एमसीए के संस्थान हैं. यहां के 45 फीसदी बच्चे पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में नौकरी लेने में सफल हो रहे हैं. एप्लाइड आर्ट्स में 43, फार्मेसी में 41, इंजीनियरिंग में 40 और 35 फीसदी बच्चे जो आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें नौकरी मिल रही है. कुल मिलाकर तकनीकी संस्थानों में प्लेसमेंट की संभावनाएं पिछले कुछ वर्षों से कम हुई हैं. परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक वर्ष इंजीनियरिंग में 10 लाख से अधिक बच्चों का नामांकन होता है. इसमें से रोजगार सिर्फ 40 फीसदी को ही मिल रहा है.

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इंजीनियरिंग के अलावा वास्तुशिल्प, फार्मेसी की मांग भी हुई कम 

सरकारी संस्थानों, संबद्ध संस्थानों से पढ़नेवाले तकनीकी ग्रेजुएट्स में उद्योगों की जरूरत के आधार पर क्षमतावान नहीं होने की वजह से युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है. कमोबेश यही स्थिति अन्य कोर्स के भी हैं. जहां रोजगार की संभावनाएं काफी कम हैं. इंजीनियरिंग के अलावा वास्तुशिल्प, फार्मेसी की मांग भी कम हुई है. यहां यह बताते चलें कि इंजीनियरिंग और अन्य कोर सात महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में परंपरागत विषयों की ही अब तक पढ़ाई हो रही है. सामयिक मांग और भूमंडलीकरण के बाद उद्योगों तथा अन्य की रोजगार संबंधी जरूरतों को पूरा करने में संस्थान भी अपने आप को सक्षम नहीं साबित कर पा रहे हैं.

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