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झारखंड में दाखिल-खारिज के 67 हजार से अधिक मामले हैं लंबित, निदान के नाम पर सेवा गारंटी का हवाला

Ranchi : झारखंड में जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के आंकड़े कम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. जमीन के म्यूटेशन का कार्य बाधित होने से जमीन की खरीद-बिक्री भी प्रभावित हुई है. सरकार भी मान रही है कि म्यूटेशन का कार्य धीमा है. आंकड़ो पर गौर करें तो 15 दिसंबर तक राज्य में दाखिल-खारिज के 67923 मामले लंबित हैं. बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने सदन में इस मामले को अल्पसूचित प्रश्न में उठाया. उनके सवाल के जवाब में राइट टू सर्विस एक्ट का हवाला देते हुये सदन को बताया कि सभी आवेदनों के लिये समय सीमा का निर्धारण किया गया है. सरकार का कहना है कि सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया गया है कि झारखंड सेवा गारंटी अधिनियम 2011 की धारा-7 व धारा-8 के तहत आवेदनों को निपटायें.

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हजारीबाग में सबसे अधिक आवेदन लंबित

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हजारीबाग में यह आंकड़ा राज्य में सबसे अधिक है. अकेले हजारीबाग में 8243 मामले लंबित हैं. वहीं पड़ोसी जिले रामगढ़ के छह अंचल में 1723 मामले लंबित हैं. गढ़वा में 2072, पलामू में 1100, गुमला में 881, चतरा में 853 म्यूटेशन के मामले लंबित हैं. वहीं, पड़ोसी जिले रामगढ़ के छह अंचल में 1723 मामले लंबित हैं. गढ़वा में 2072, पलामू में 1100, गुमला में 881, चतरा में 853 म्यूटेशन के मामले लंबित हैं. विधानसभा में सदर विधायक मनीष जायसवाल इसके पीछे सीधे-सीधे अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेवार मानते हैं. उनका कहना है कि जानबूझ कर मामले को लंबित रखा जाता है. लंबित मामले सीधे-सीधे भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं.

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क्या है प्रावधान

90 दिनों में दाखिल-खारिज के निबटारे का प्रावधान है, लेकिन इस अवधि के बाद भी फाइलें लटकी हुई हैं. सेवा की गारंटी अधिनियम के तहत तय समय में हर हाल में दाखिल-खारिज कर देना है. यदि अंचलाधिकारी दाखिल-खारिज नहीं करते हैं, तो अपने ऊपर के पदाधिकारियों को भेज देंगे.

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