न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बैड लोन के लिए बैंकों के 6,000 से अधिक अधिकारी दंडित किये गये : अरुण जेटली

वाणिज्यिक बैंकों का एनपीए साल 2016 के मार्च अंत में 5.66 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर साल 2018 के मार्च अंत में 9.62 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया.  उसके बाद रकम घटकर 9.43 लाख करोड़ हो गयी है.

1,191

NewDelhi :  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने  कहा कि लोन देने में चूक करने के लिए सरकारी बैंकों के 6,000 से अधिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गयी है.  जेटली ने राज्यसभा में शुक्रवार को अपने लिखित जवाब में कहा कि दोषी अधिकारियों को दंडित किया गया है, जिनमें बर्खास्तगी, कंपल्सरी रिटायरमेंट और डिमोशन जैसे कदम शामिल हैं.  जेटली ने कहा, राष्ट्रीयकृत बैंकों से मिली जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में 6,049 अधिकारियों को लोन देने में चूक करने का कसूरवार ठहराया गया, जिसके चलते एनपीए हुआ.  मंत्री ने कहा, दोषी अधिकारियों के खिलाफ छोटे/बड़े जुर्माने लगाये गये हैं और एनपीए की राशि के आधार पर तमाम मामलों में सीबीआई और पुलिस में शिकायत दर्ज करायी गयी हैं.  बता दें कि पीएनबी और केनरा बैंक सहित 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 21,388 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ है.  जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में कुल नुकसान महज 6,861 करोड़ रुपये था.

बैंकों ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 60,713 करोड़ की  रिकवरी की

इस क्रम में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि सरकारी बैंकों के 25 करोड़ रुपये से अधिक बकाया वाले किसी भी लोन अकाउंट को जून 2014 के बाद से एवरग्रीन घोषित नहीं किया गया है. राज्यसभा में एक अन्य लिखित जवाब में शुक्ला ने कहा कि बैड लोन की पहचान में पारदर्शिता बरतने के कारण सभी वाणिज्यिक बैंकों का एनपीए साल 2016 के मार्च अंत में 5.66 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर साल 2018 के मार्च अंत में 9.62 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया.  उसके बाद रकम घटकर 9.43 लाख करोड़ हो गयी है.  उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 60,713 करोड़ रुपये की रेकॉर्ड रिकवरी की है;  यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में दोगुना है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: