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जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर हैं 50 से अधिक बच्चे

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Dhanbad : एक ओर सरकार शिक्षा के स्‍तर को सुधारने के लिए राज्य के शिक्षकों को बीएड करने की समय सीमा तय कर दी है. विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी समय समय पर दिशा निर्देश दिया जाता रहा है. बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र या फिर उत्क्रमित विद्यालयों में बेहतर सुविधा देने को लेकर दावा किया जाता रहा है. लेकिन धनबाद के श्रमिक नगरी भूली में एक आंगनबाड़ी केंद्र की हालत ऐसा है कि बच्चे डर से पढ़ने नहीं आते है.

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भवन मरम्मती को लेकर कोई ठोस पहल नहीं

भूली ई ब्लाक सेक्टर एक स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को पढ़ाई के लिए हर दिन मौत का सामना करना पड़ता है. उक्त भवन लगभग दस साल पुराना है और अब जर्जर हो चुका है. आंगनबाड़ी केंद्र में 50 बच्चों का नाम दर्ज है लेकिन भय के कारण बच्चों की उपस्थिति कम होती है. भवन में खतरनाक तरीके से दरार आ चुका हैं लेकिन विभाग की ओर से भवन मरम्मती को लेकर कोई ठोस पहल नहीं किया गया है.

जर्जर भवन में ही सेविका बबीता कुमारी बच्चों को पढ़ाती है. बबीता कहती हैं कि जर्जर भवन के कारण बच्चों के उपस्थिति पर भी असर पड़ रहा है. डर के कारण अभिभावक अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में नहीं भेज रहे हैं. विभाग को इसकी जानकारी देने के बावजूद भी कोई ठोस पहल नहीं किया गया है.

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