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मोदी काल में अर्थव्यवस्था गर्त में, पहली तिमाही की GDP -23.9 फीसदी, 40 साल में पहली बार गिरावट

New Delhi: मोदी काल में मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट आयी है. सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी किये गये आंकड़े से यह बात सामने आयी है.

ऐसा बीते 40 साल में पहली बार हुआ है जब देश की जीडीपी माइनस में चली गयी हो. कोर सेक्टर के आंकड़ों का प्रदर्शन भी निराशाजनक पाया गया है. जुलाई महीने में आठ उद्योगों के उत्पादन में 9.6 फीसदी की गिरावट आयी है.

जीडीपी में इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे मोदी सरकार के सनक भरे फैसलों की सीधी भूमिका रही है.

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सनक भरे फैसलों ने चौपट किये हालात

 

यूपी चुनाव जीतने के लिये सनक भरे मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले, खराब तरीके से लागू किये गये जीएसटी और अब कोरोना के बहाने लागू लॉकडाउन ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है.

नोटबंदी के फैसले ने जहां असंगठित क्षेत्र को भीखमंगा बना दिया, वहीं खराब तरीके से लागू जीएसटी ने राज्यों की सरकार को कंगाल बना दिया है. बाद में सिर्फ चार घंटे की नोटिस में लागू लॉकडाउन ने रही-सही कसर उतार दी है.

इस तिमाही के शुरुआती दो महीने अप्रैल और मई में लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप रही है. जून में थोड़ी रफ्तार आयी. रेटिंग एजेंसियों और अर्थशास्त्रियों ने आशंका जतायी थी कि जून तिमाही के जीडीपी में 16 से 25 फीसदी की गिरावट आ सकती है.

औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों, केंद्र और राज्य सरकारों के व्यय आंकड़ों, कृषि पैदावार और ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग, बीमा आदि कारोबार के प्रदर्शन के आंकड़ों को देखते हुए यह आशंका जाहिर की गयी थी.

जानकारों का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण, व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट, संचार आदि सेक्टर देश की जीडीपी में करीब 45 फीसदी का योगदान रखते हैं और पहली तिमाही में इन सभी सेक्टर के कारोबार पर काफी बुरा असर पड़ा.

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देश के लिए खतरे की घंटी

जीडीपी कम होने की वजह से लोगों की औसत आय कम हो जाती है और लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं. इसके अलावा नई नौकरियां पैदा होने की रफ्तार भी सुस्‍त पड़ जाती है. आर्थिक सुस्‍ती की वजह से छंटनी की आशंका बढ़ जाती है. वहीं लोगों का बचत और निवेश भी कम हो जाता है.

जीडीपी रेट में गिरावट का सबसे ज्यादा असर गरीब लोगों पर पड़ता है. भारत में आर्थिक असमानता बहुत ज्यादा है. इसलिए आर्थिक वृद्धि दर घटने का ज्यादा असर गरीब तबके पर पड़ता है.

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