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200 से ज्यादा लेखकों-सामाजिक कार्यकर्ताओं ने  पत्र जारी कर कहा,  जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल  370 हटाना असंवैधानिक

कार्यकर्ताओं ने जम्मू और कश्मीर को  दिया गया  विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के केंद्र के फैसले को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक करार दिया है.

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NewDelhi : जम्मू और कश्मीर के मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ देश भर के 200 से ज्यादा लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता एकजुट हो रहे हैं. इन लोगों ने 15 अगस्त को  साझा पत्र जारी कर में कहा  है कि  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाकर केंद्र सरकार ने लोकतंत्र का मजाक उड़ाया है.  इन लेखकों और कार्यकर्ताओं ने जम्मू और कश्मीर को  दिया गया  विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के केंद्र के फैसले को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक करार दिया है.  कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से इस बारे में नहीं पूछा गया. पांच अगस्त, 2019 से जो वहां पर स्थिति बनी हुई है, वह साफ दर्शाती है कि सरकार कश्मीरियों के असंतोष और लोकतांत्रिक असहमति से घबराती है.

हस्ताक्षरकर्ताओं ने उन मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया कि प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गयी और घाटी में लोगों की आवाजाही और संचार व्यवस्था ठप है. पत्र में कहा गया कि भारत सरकार की ये गतिविधियां संवैधानिकता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों में सम्मान की पूर्ण कमी को दिखाता है. यह भारत के लोगों के लिए सही नहीं है, जिन्होंने दशकों के लोकतांत्रिक मूल्यों से लाभ उठाया है. हम जम्मू और कश्मीर में हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर चिंतित हैं.

देशभर में डर का माहौल बनाने की निंदा करते हैं

हम विचलित हैं कि दशकों से हिंसा और राजनीतिक असंतोष के बीच रह रहे यहां के लोगों को बीते लगभग दस दिनों से सैन्य दबाव के जरिए उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया है. हम असहमति जताने वालों को भारत सरकार द्वारा चुप कराये जाने, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से चिंतित हैं. हम भारत सरकार द्वारा मैजोटेरियन पॉपुलिज्म के उपयोग से देशभर में डर का माहौल बनाने की निंदा करते हैं.

लेखकों ने  घाटी में न्यूनतम मानवाधिकारों को तत्काल प्रभाव से बहाल करने की मांग की है.  साथ ही अनुच्छेद 370 को भी फिर से लागू करने को कहा है.   पत्र पर अमिताभ घोष, नयनतारा सहगल, पेरुमल मुरुगन, अशोक वाजपेयी, टीएम कृष्णा, जेवी पवार, बजवाड़ विल्सन, अमित चौधरी, शशि देशपांडे, शरण कुमार लिंबले, पी.साईनाथ, दामोदर मौजो, दलीप कौर तिवाना, बामा, संभाजी भगत, जेरी पिंटो और देशभर के अन्य हिस्सों में विभिन्न भाषाओं में सक्रिय कई लोगों के हस्ताक्षर शामिल हैं.

बता दें कि हाल ही में संसद के दोनों सदनों से जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन बिल पास हुआ था, जिसके तहत अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधान खत्म कर दिये गये.  जम्मू और कश्मीर अब विशेष राज्य के बजाय दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख  में विभाजित कर दिया गया है.

Whmart 3/3 – 2/4

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