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हड़िया बेचने वाली 13 हजार से अधिक महिलाओं ने फुलो-झानो आशीर्वाद अभियान से बनाई नई पहचान

15,456 ग्रामीण महिलाओं को किया गया है चिह्नित

Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर शुरू हुई फुलो-झानो आशीर्वाद अभियान आज महिलाओं के लिए आजीविका का साधन बन चुकी है.

इस अभियान के जरिये हड़िया-दारू बेचने वाली 13,356 ग्रामीण महिलाएं सम्मानजनक आजीविका के साधन से जुड़ चुकी हैं.

इस अभियान के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में सर्वेक्षण कर हड़िया-दारू की बिक्री एवं निर्माण से जुड़ीं करीब 15,456 ग्रामीण महिलाओं को चिह्नित किया गया है. इस अभियान का क्रियान्वयन झारखंड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी द्वारा किया जा रहा है.

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अभियान का उद्देश्य :

अभियान का उद्देश्य है कि राज्य की ऐसी महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना, जो मजबूरीवश दारू-हड़िया निर्माण और बिक्री से जुड़ी हैं.

यह अभियान की सफलता ही है कि पेट पालने की मजबूरी में जिस हाट में कोलेबिरा प्रखंड के कोम्बाकेरा गांव की सोमानी देवी पहले हड़िया-दारू बेचती थी और लोगों के बुरे व्यवहार को झेलती थीं, आज उसी हाट-बाज़ार में अपने होटल का संचालन कर रही हैं.

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काउंसलिंग कर आजीविका से जोड़ा जा रहा है :

फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान के तहत सबसे पहले हड़िया-दारू की बिक्री से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं का विस्तृत सर्वेक्षण कर चिह्नित किया गया है.

फिर इन महिलाओं को सखी मंडल के दायरे में लाकर उनकी काउंसलिंग की गई है, ताकि वे सम्मानजनक आजीविका से जुड़ सकें.

इन महिलाओं को उनकी इच्छा अनुसार स्थानीय संसाधनों के आधार पर वैकल्पिक आजीविका के साधनों, जैसे कृषि आधारित आजीविका, पशुपालन, वनोपज संग्रहण, मछली पालन, रेशम उत्पादन, मुर्गीपालन, वनोत्पाद से जुड़े कार्य एवं सूक्ष्म उद्यमों आदि से जोड़ा जा रहा है.

सखी मंडलों ने इस अभियान के तहत चिह्नित महिलाओं के आजीविका प्रोत्साहन के लिए 10 हज़ार रुपये ऋण राशि का प्रावधान किया है, जो एक साल तक ब्याजमुक्त है.

वहीं, सामान्य व्यवस्था के तहत चिह्नित महिलाएं और अधिक ऋण सखी मंडल से ले सकती हैं. इन्हीं चिह्नित महिलाओं में से कुछ दीदीयों को सामुदायिक कैडर के रूप में भी चुना गया है, जो दूसरों के लिए मिसाल बनकर हड़िया-दारू के खिलाफ इस अभियान का नेतृत्व कर रही हैं.

वर्जन….

“फुलो-झानो आशीर्वाद अभियान के तहत काउंसेलिंग कर हड़िया दारू बिक्री करने वाली महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के आधार पर सशक्त आजीविका उपलब्ध कराया जा रहा है. ब्याजमुक्त कर्ज का भी प्रावधान है, जिससे ये महिलाएं अपनी जीविका के लिए उद्यम शुरू कर अच्छी आमदनी कर रही हैं.“

नैन्सी सहाय, सीईओ, जेएसएलपीएस

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