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मॉब लींचिग से देश में सौ से अधिक हत्या, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं हो रहा पालन: संगठन

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Ranchi: पिछले चार सालों से अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों पर हमले किये जा रहे हैं. देश में मॉब लींचिग से इन चार सालों में सौ अधिक हत्याएं हो चुकी हैं. फिर भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं माना जा रहा. उक्त बातें आमया के केंद्रीय अध्यक्ष एस. अली ने अल्पसंख्यक अधिकार सम्मेलन में कही. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक बोर्ड के नाम पर सरकार सिर्फ दिखावा कर रही है. अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है. शिक्षा, रोजगार से लेकर हर क्षेत्र में अल्पसंख्यकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. सम्मेलन का आयोजन कांके स्थित मुहर्रम मैदान में किया गया था.

ईसाई समुदाय पर धर्मांतरण का लग रहा झूठा आरोप

एस. अली ने कहा कि सरकार किसी भी समुदाय को नहीं छोड़ रही. ईसाई समुदाय को धर्मांतरण के नाम पर  निशाना बनाया जा रहा है. झूठे आरोप लगाकर ईसाइयों को जेल में डाला जा रहा है. इससे पता चलता है कि सरकार की मानसिकता कैसी है. सरकार को समझना होगा कि यह देश धर्म निरपेक्ष है. ऐसे में सरकार को हर धर्म समुदाय की भावना का ध्यान रखना चाहिये.

वोट चाहती है सरकार, प्रतिनिधित्व नहीं देती

वक्ताओं ने कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों से वोट चाहती है. सेकुलर राजनीतिक दल भी इस पर चुप्पी नहीं तोड़ रहे. वोट सभी को चाहिये, लेकिन मुस्लिमों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं देना चाहते. अल्पसंख्यक दूसरे समुदाय के प्रतिनिधियों को वोट दें, लेकिन अगर यहीं अल्पसंख्यक खुद चुनाव में खड़े हो तो उन्हें दूसरे समुदाय से वोट नहीं मिलता. ये चिंता का विषय है.

ये प्रस्ताव पारित किये गये

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मुस्लिम आबादी के अनुसार विधानसभा में 13, लोकसभा में तीन और राज्यसभा में एक सीट दी जाये, सरना धर्म कोड लागू किया जाये, भूमि अधिग्रहण कानून रद्द किया जाये, मुस्लिम आबादी के अनुपात में सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी और उच्च और प्लस टू स्कूलों में दूसरे राज्यों के बहाल लोगों की नियुक्ति रद्द की जाये.

ये लोग थे उपस्थित

मौके पर जियाउद्दीन, इस्मे आजम, एकराम हुसैन, जीमल अख्तर, अबरार अहमद, सम्मी अहमद, मोदस्सिर आलम, हाजी अब्दुल रहमान, अफताब आलम समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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