Opinion

दीया-मोमबत्ती जलाने से ज्यादा जरुरी सोशल डिस्टेंस, लॉकडाउन और संक्रमित व्यक्तियों को क्वारेंटीन करना

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Md M Tauseef

ये एक सच्चाई है और इस सच्चाई को सभी को मान लेना चाहिए. कारोना वायरस ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. यह ऐसा वायरस है, जिसका वैक्सीन बनाने में दुनियाभर के डॉक्टरों के पसीने छूट रहे हैं. लेकिन अभी तक मेडिसिन के शोध संस्थानों को कामयाबी नहीं मिल सकी है. ऐसी स्थिति में डब्ल्यूएचओ के गाइडलाइन को अपनाकर करोना वायरस से बचा जा सकता है.

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चीन की पैदावार करोना वायरस चीन के वुहान प्रांत में आतंक फैलाते हुए यूरोप के कई देशों में फैल गया. इसके बाद अमेरिका और दुनिया के लगभग 210 देशों में कहर बरपा चुका है.

जिसमें भारत भी शामिल है. विश्व के विकसित देश जिनकी स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत अच्छी है. उन देशों की हालत कोरोना वायरस ने इस कदर खराब कर दिया है कि अमेरिका और इटली जैसे देश के मुखिया जब अपनी बात देश और दुनिया की मीडिया के सामने रखते हैं. उस समय उनका कॉन्फिडेंस देखने लायक होता है.

यानी कोरोना वायरस के सामने उनका कॉन्फिडेंस बिल्कुल झुका हुआ नजर आ रहा है. कोरोना वायरस के आतंक की वजह से राष्ट्राध्यक्षों की आवाज में लाचारी और बेबसी नजर आ रही है.

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यह हालात विकसित देश अमेरिका, इटली, फ्रांस, यूके, जर्मनी और स्पेन की है. सच्चाई यह है कि जब करोना वायरस चाइना के वुहान प्रांत में फल-फूलकर आतंक मचा रहा था और चीन से लोग दूसरे देशों की यात्राएं कर रहे थे. तब इन देशों ने कारोना वायरस को बहुत हल्के में लिया.

डब्ल्यूएचओ के गाइडलाइन को फॉलो नहीं किया या फिर इन देशों की सरकारों को कोरोना वायरस की पहेली को समझने में देर हो गयी. चीन अपने मुल्क के पैदावार कोरोना को कंट्रोल करने में कामयाब रहा. वुहान के अलावा देश के दूसरे प्रांतों में वायरस को फैलने से रोकने में कामयाब रहा. इधर, दुनिया के 80 प्रतिशत से ज्यादा करोना संक्रमित स्पेन, जर्मनी, अमेरिका और यूके में हैं.

बिना वैक्सीन के वायरस से निजात पाना अमेरिका एवं यूरोपीय देशों के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. इन सबके बीच भारत ने वक्त रहते डब्ल्यूएचओ के सुझाव को मान लिया और उस सुझाव के मुताबिक, काम करना शुरू कर दिया. डॉक्टर कोरोना का वैक्सीन अभी तक तैयार नहीं कर पाये हैं. ऐसी स्थिति में सोशल डिस्टेंस, लॉक डाउन और संक्रमित व्यक्तियों को क्वारेंटीन की आवश्यकता है.

भारत सरकार ने जब से पूरे देश को लॉक डाउन किया है. लगभग हर जगह लॉक डाउन का पालन किया जा रहा है. अचानक लॉकडाउन की वजह से देश के विभिन्न राज्यों में काम कर रहे मजदूर, श्रद्धालु कहीं ना कहीं फंस गये. मजदूरों ने अपने छोटे बच्चों एवं महिलाओं के साथ हजार किलोमीटर की दूरी से भी ज्यादा पैदल चल कर अपने घर पहुंचने की हिम्मत की और पहुंचे भी.

लॉकडाउन के बाद दिल्ली का आनंद विहार बस अड्डा एवं नेशनल हाईवे का नजारा भयावह था. हजारों की संख्या में मजदूर पैदल अपने घर जाने को मजबूर हो गये. एक बात तो जरूर है कि सरकार से कहीं ना कहीं चूक हुई है. जिसकी वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

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देश के मजदूरों के पलायन से ना केवल मजदूरों के जीवन, पालन-पोषण पर असर पड़ेगा. बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर देखने को मिलेगा. सरकार द्वारा लॉकडाउन का एलान तैयारी करके किया गया होता, तो शायद मजदूर एवं आम लोगों को दिक्कतों से दो-चार होना नहीं पड़ता.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक कई बार देश को संबोधित कर चुके हैं. डब्ल्यूएचओ द्वारा दिये गये सुझावों को देशवासियों से साझा करते रहे हैं. यह अच्छी बात है. हम सभी को उस सुझाव का पालन करना चाहिए.

देश के लोग कर भी रहे हैं. लेकिन प्रधानमंत्री जिस तरह से यूरोपियन देशों एवं अमेरिका की नकल ताली, थाली बजाकर डॉक्टरों की हौसला अफजाई करवाया, इससे बेहतर तो यह होता की डॉक्टरों एवं नर्सों को डबल सैलरी से नवाजा जाता.  इससे उनका और उनके परिवार का भी मनोबल बढ़ता.

अमेरिका की सरकार अपने नागरिकों को $12000 और उनके बच्चों को $500 घर बैठे देने जा रही है. क्या भारत सरकार अमेरिका की सरकार के इस कार्य का भी नकल करेगी?  काश, अगर अमेरिका के इस कार्य को भी अमल में लाया जाता, तो आम जनमानस एवं लगभग 38 करोड़ मजदूरों का फायदा हो जाता. सरकार द्वारा विधवा एवं गरीब को 500 और 1000 देने से उनकी मूलभूत समस्याएं दूर नहीं होंगी.

मेरा मानना है कि देश के सभी लोगों को कोरोना वायरस की जांच में बढ़-चढ़कर साथ देना चाहिए. डब्ल्यूएचओ द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करना चाहिए. जो ना केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के लोग कर रहे हैं.

कोरोना वायरस से बचने के लिए फिलहाल सोशल डिस्टेंसिंग और लॉक डाउन ही उचित उपाय है. पिछले दिनों कोरोना वायरस के जांच के दौरान कुछ लोगों द्वारा डॉक्टरों के ऊपर थूकना एवं पुलिस के ऊपर पत्थर फेंकना जैसी घटनाएं सुर्खियों में रहीं.

इस घटना की जितनी भी निंदा की जाए कम होगा, लेकिन इन सब घटनाओं की आड़ में भारत सरकार अपनी आधी-अधूरी तैयारी छुपाने का प्रयास कर रही है. अभी जरुरत इस बात की है कि भारत सरकार राज्य सरकारों को ज्यादा से ज्यादा स्वास्थ्य सहायता दे, ताकि लोगों को मेडिकल फैसिलिटी मिल सके.

मेडिकल साइंस के विकास पर गंभीरता से ध्यान देना पड़ेगा, तभी जाकर कोरोना वायरस से लड़ पायेंगे. मेडिकल साइंस के सामने ताली, थाली, दीया, मोमबत्ती की बात करना समझ से परे है.

नोटः  लेखक कांग्रेस के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता हैं.

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