Ranchi

मूलवासी सदन मोर्चा का मिलन समारोह आयोजित

झारखंड निर्माण के बाद भी सदानों के सपने अधूरे : राजेंद्र प्रसाद

Ranchi: झारखंड राज्य के आंदोलन में मूलवासी सदानों ने बड़ी भूमिका निभायी. अलग राज्य के लिए आंदोलन में सदानों का साथ ना मिला होता तो राज्य बनना संभव नहीं था. राज्य बनने पर सदानों ने भी सुनहरे सपने देखे थे, हमारा अपना राज्य होगा, बच्चों को नौकरी मिलेगी, अधिकार मिलेगा. लेकिन राज्य निर्माण के बाद सदानों की घोर उपेक्षा की गयी.

65% बहुसंख्यक सदानों की अनदेखी कर राज्य के विकास की बात करना बेईमानी होगी उक्त बातें मूलवासी सदान मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने अपने अध्यक्षीय भाषण में मोर्चा द्वारा आयोजित मिलन समारोह 2021 में उपस्थित शिक्षाविदों, युवाओं और छात्रों को संबोधित करते हुए कही.

प्रसाद ने कहा कि सदान वर्ग आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक तीनों रूप से कमजोर हैं. उन्होंने कहा कि सदान को परिभाषित करने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि हमारी भाषा, संस्कृति जनजातियों की तरह ही है. उन्होंने कहा कि सदान और जनजातियों की एकता अटूट है. इन दोनों समुदाय को अलग करने का प्रयास करना पानी में लकीर खींचने जैसी बात होगी.

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पूर्व सांसद रामटहल चौधरी ने कहा कि सदानों में राजनीतिक चेतना की कमी है. उन्होंने कहा कि झारखंड में सदानों को किसान आंदोलन, जो दिल्ली में हो रहा है, उसी तरह करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि सदान किसी भी दल में रहे, परन्तु सदानों के मुद्दे पर आगे बढ़कर काम करने की जरूरत बतायी.

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या होने के बाद भी सारी पंचायतें और जिला परिषद 112 प्रखंडों में आरक्षित है. यह झारखंड के सदानों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.

मधु मंसूरी ने कहा कि सदानों के अधिकारों को संरक्षित करना और सुरक्षा प्रदान करना सरकार की नैतिक जिम्मेवारी है. उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद झारखंड की पहली सरकार ने सदानो को उनके अधिकार से वंचित किया. ऐसा कर पूर्व की सरकार ने एक बड़ी राजनीतिक भूल की है.

पद्मश्री ने कहा कि सदान यहां के मूल निवासी हैं. जिस प्रकार जनजातियों के विभिन्न उपजातियां हैं उसी प्रकार सदनों में भी कई उपजातियां हैं. उन्होंने कहा कि सदानों की राजनीतिक भागीदारी के लिए विधानसभा की सीटों को 81 से बढ़ाकर 160 करना चाहिए.

पद्मश्री ने कहा कि हेमंत सरकार सदानों के समर्थन से बनी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सदानों को बुलाकर उनकी समस्याओं को मिल बैठकर सुनना चाहिए. क्षितीश कुमार राय ने कहा कि सवर्णो को भी 10% आरक्षण मिल गया है, ऐसे में इसका लाभ झारखंड के सदान सवर्णो को मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पिछड़ी जातियों की आबादी करीब झारखण्ड में करीब 55% है, ऐसे कम से कम 36% आरक्षण मिलना चाहिए. दलित का आरक्षण को 1% पूर्व की सरकार ने घटाया था उसको भी पुनः 1% बढ़ाने की जरूरत है.

वरिष्ठ पत्रकार चन्दन मिश्रा ने कहा कि सदान आंदोलन आज एक ऐसे मुकाम पर खड़ा है, जहां इसके हाथ में कुछ नहीं है. उन्होंने सदानों से संगठित होने का आह्वान किया.

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वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा ने कहा, भारत की स्वतंत्रता एवं झारखंड राज्य के गठन में सदानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. परन्तु इतिहास में इसकी कहीं चर्चा नहीं है. सदानों के योगदान को लोगों के मानस पटल तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया.

राजकुमार साहू ने कहा कि सदान को परिभाषित करने के लिए सदान आयोग का गठन सरकार को करना चाहिए. डॉ अनिल मिश्रा ने कहा कि नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया और कुरमाली सदानों की भाषा है और इसे जनजाति के लोग भी बोलते हैं. इन चारों भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की.

मिलन समारोह के माध्यम से सदान आयोग का गठन करने विधानसभा की सीट बढ़ाकर 160 करने, पिछड़ा को कम से कम 36% आरक्षण देने, सवर्ण को 10% मिलने वाले आरक्षण सदान सवर्णो को मिलने, दलित का 1% आरक्षण देने की मांग की गयी.

समारोह में निर्णय लिया गया कि हर सदानों के घरों में सदान झंडा लगेगा, एक लाख सदानों को सदस्यता तुरन्त दी जाएगी. 21 मार्च को रांची में होगा पारिवारिक होली मिलन समारोह, 12 अप्रैल को बेड़ो में सदान सम्मेलन आदि का निर्णय लिया गया.

समारोह को सम्बोधित करने वालों में झारखण्ड प्रदेश के अध्यक्ष राजकुमार साहू, अहीर समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ करम चन्द्र अहीर, ओबीसी महासभा झारखण्ड प्रदेश के अध्यक्ष अमित साहू, महली समाज के प्रदेश अध्यक्ष हरि नारायण महली कायस्थ समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रणव कुमार बब्बू, डॉ अनिल मिश्रा, डॉ जनार्दन प्रसाद, डॉ सुदेश कुमार साहू, सुरेश प्रसाद, मनोज वर्मा, कैलाश नाथ, जगन्नाथ साहू, चंद्रनाथ प्रसाद, संजय साहू, मंजूर खान, निसार खान, विशाल कुमार, राजू पासवान, सरफराज खान, मृत्युंजय नाथ मिश्रा, मुकेश सिंह, विजय साहू, मणिकांत पाठक, ब्रज भूषण पाठक, नीरज साहू, अरविंद कुमार, अजिज विश्वकर्मा, किशोर गौन्झू, मनोज वर्मा, सुनिल साहू, मंजूर खान, विशाल कुमार, निसार खान, राजेश कुमार, सरताज खान, सोनू खान, सयूम अंसारी, सुरेश प्रसाद, अरविंद प्रसाद, देवदास विश्वकर्मा, रमाकांत महतो, बासुदेव महतो, पंकज कुमार महतो, राजेश कुमार, रामप्रसाद, महेंद्र ठाकुर, राजु हजाम के अलावा सैकड़ों लोग उपस्थित थे.

संचालन डॉ शंकुतला मिश्रा ने किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा और चन्दन मिश्रा को सम्मानित किया गया. अन्त में माइकल किंडो, डॉ आरपी साहू, जयकान्त मण्डल, विनोद कुमार प्रसाद को श्रद्धांजलि दी गयी.

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