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झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से, हंगामेदार होने के आसार

Ranchi : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से शुरू होगा. यह सत्र 9 सितंबर तक चलेगा. सत्र के हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं. राज्य सरकार इस सत्र में चालू वित्तीय वर्ष का प्रथम अनुपूरक बजट पेश करेगी. इसके आलावा कई विधेयकों को भी सदन में रखा जायेगा. 6 सितंबर को सदन में वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव चालू वित्तीय वर्ष के लिए प्रथम अनुपूरक बजट पेश करेंगे. 7 सितंबर को बजट पर वाद-विवाद और मतदान होगा.

सत्र के सफल संचालन को लेकर स्पीकर रविन्द्र नाथ महतो ने विधायक दल के नेताओं के साथ-साथ राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. विधायक दल के नेताओं की बैठक में भाजपा शामिल नहीं हुई.

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सोमवार को होगा मुख्यमंत्री प्रश्न काल

सदन में सोमवार को बारह बजे से साढ़े बारह बजे तक मुख्यमंत्री प्रश्नकाल होगा जिसमें विधायक मुख्यमंत्री से सीधे नीतिगत सवाल करेंगे.

मालूम हो कि बजट सत्र में मुख्यमंत्री प्रश्न काल नहीं हुआ था जिसको लेकर विपक्ष के विधायकों ने जम कर हंगामा किया था. उस समय सरकार की तरफ से यह जवाब दिया गया था कि कोरोना को लेकर मुख्यमंत्री प्रश्न काल नहीं हो रहा है.

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बाबूलाल को नेता विधायक दल की बैठक में नहीं आमंत्रित करने से भाजपा नाराज

सत्र के सफल संचालन को लेकर स्पीकर रविन्द्र नाथ महतो ने गुरुवार को विधायक दल के नेताओं की बैठक की. इस बैठक में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी को आमंत्रित नहीं कर भाजपा की तरफ से पार्टी के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण को आमंत्रित किया गया. इस बात को लेकर भाजपा ख़ासी नाराज है.

विपक्ष के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि विधायक दल की बैठक में बाबूलाल मरांडी को नहीं बुला कर उन्हें अपमानित किया गया है. कहा कि सरकार के इशारे पर बार-बार विधानसभा द्वारा बाबूलाल मरांडी का अपमान किया जा रहा है. भाजपा के विधायक अपने नेता के अपमान पर चुप नहीं बैठेंगे.

उन्होंने कहा कि उन्हें विधायक दल की बैठक में आमंत्रित किया गया था जबकि विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी हैं.

उस बैठक में बतौर पार्टी के मुख्य सचेतक उनकी कोई भूमिका नहीं थी इसलिए बैठक में नहीं गया. कहा कि कल से शुरू हो रहे मानसून सत्र में फिर से इस मुद्दे को भाजपा के विधायक उठायेंगे.

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रोजगार, शराब, कानून व्यवस्था, राजभाषा के मामले पर गरमायेगा सदन

विधानसभा के मानसून सत्र में रोजगार, शराब, कानून व्यवस्था, राजभाषा के मामले को लेकर सदन गरमायेगा. राज्य सरकार ने वर्ष 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित किया है लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी इसपर कोई काम नहीं हुआ है.

इसी तरह शराब व्यवसाय को सिंडिकेट के हाथों में दिये जाने का मामला भी सरकार के लिए गले की हड्डी बन सकता है. नियुक्तियों में भाषायी विवाद अभी जारी है.

विपक्ष के साथ साथ सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी कैबिनेट के फैसले का खुल कर विरोध किया है. यह मामला भी सदन में प्रमुखता से उठाया जायेगा. लचर कानून व्यवस्था का मुद्दा भी सदन में उठेगा.

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पक्ष- विपक्ष ने कसी कमर

सदन में सरकार को घेरने को लेकर जहां विपक्ष पूरी तैयारी में है वहीं सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष के प्रहार का जवाब देने के लिए कमर कस ली है. विपक्ष के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि विपक्ष के पास मुद्दों की कमी नहीं है.

कहा कि जब से झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनी है आम जन का जीना बेहाल हो गया है. कानून व्यवस्था चौपट है. राजधानी में हर दिन हत्याएं हो रही हैं. जज और वकील की हत्या हो जाती है.

रोजगार देने के वादे के साथ सत्ता में आयी पार्टियां अबतक एक को भी रोजगार नहीं दे सकी है. हिंदी को राजभाषा का दर्जा नहीं दिया जाता लेकिन उर्दू को राजभाषा का दर्जा दे दिया गया.

इन सभी बिंदुओं पर विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा. वहीं संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि सदन में विधायकों के सभी सवालों का जवाब देने के लिए सरकार तैयार है.

उन्होंने कहा कि सदन में नियमतः जो भी सवाल आयेंगे सरकार उसका जवाब देगी. उन्होंने आशा व्यक्त की कि जनहित में मानसून सत्र काफी उपयोगी होगा.

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