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प्रचार में लगे वाहनों के इस्तेमाल पर लगातार की जायेगी निगरानी: डॉ मनीष रंजन

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  • उम्मीदवारों को वाहनों का विवरण रिटर्निंग अफसरों को देना जरूरी
  • बगैर जानकारी के लगे प्रचार वाहनों पर की जायेगी कार्रवाई

Ranchi:  चुनाव के दौरान प्रचार वाहनों पर निर्वाचन आयोग की तरफ से कड़ी निगरानी की जायेगी. अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी डॉ मनीष रंजन ने कहा है कि सभी उम्मीदवारों को प्रचार में लगे वाहनों की जानकारी रिटर्निंग अफसरों को देना जरूरी है.

उन्होंने कहा है कि वाहनों की जानकारी देने के बाद ही रिटर्निंग अफसर वाहनों का परमिट निर्गत करेंगे. निर्वाची पदाधिकारी से प्राप्त किये गये वाहन परमिट को गाड़ियों के आगेवाली स्क्रीन पर लगाना भी अनिर्वाय किया गया है.

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दोपहिया वाहन (मोटरसाइकिल, स्कूटर, मोपेड), साइकिल, रिक्शा से प्रचार को भी आयोग ने प्रचार की श्रेणी में रखा है. इनके भी परमिट जिला निर्वाची पदाधिकारी की ओर से जारी किये जायेंगे, जिसे मांगे जाने पर दिखाना जरूरी होगा.

निर्वाची पदाधिकारी की तरफ से वाहनों के परमिट को लेकर विभिन्न टीम भी बनायी गयी है, जिसमें प्रचार वाहनों का ब्योरा रहेगा.

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बिना अनुमति के प्रचार वाहन के इस्तेमाल पर होगी कार्रवाई

डॉ रंजन ने बताया कि यदि निर्वाची पदाधिकारी की लिखित अनुमति के बिना ही प्रचार वाहन का प्रयोग किया जाता है तो इसे उम्मीदवारों के लिए अप्राधिकृत माना जायेगा.

ऐसी स्थिति में भादवि की धारा 171-ज के प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई भी की जायेगी. वाहनों को जब्त कर प्रचार प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा. इसके अलावा लेखा टीम की रजिस्टर में वाहनों का नंबर जोड़ दिया जायेगा.

उम्मीदवारों को रिटर्निंग अफसर के समक्ष वाहन की जानकारी उपलब्ध करानी होगी.

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उड़न दस्ता दल वाहन का करेगा अधिग्रहण

डॉ रंजन ने बताया कि यदि किसी विशेष उम्मीदवार ने वाहन के लिए अनुमति ली है और उसका प्रयोग किसी अन्य अभ्यर्थी द्वारा किया जा रहा है.

तब उड़नदस्ता ऐसे वाहनों को जब्त कर लेगी. उड़न दस्ता द्वारा सहायक व्यय प्रेक्षक को रिपोर्ट दी जायेगी ताकि उस पर होनेवाला खर्च उम्मीदवार के खाते में डाला जाएगा जो परमिट वाले वाहन का उपयोग कर रहे थे.

उम्मीदवार यदि अनुमति लेने के बाद भी दो दिन से अधिक वाहनों को प्रचार कार्य में नहीं लाते हैं तो उन्हें निर्वाची पदाधिकारी को सूचना देना जरूरी होगा.

वीडियो वाहनों की भी होगी जांच

यदि वीडियो वैन में स्टार प्रचारक, अधिकृत उम्मीदवार के नाम का उल्लेख किये बिना या किसी भी निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी की तस्वीर के बिना, चुनाव प्रक्रिया के दौरान सामान्य दल के प्रचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो ये खर्च दल के खाते में डाला जाएगा.

लोकसभा चुनाव के मामले में 90 दिनों के भीतर दल को इसकी जानकारी दी जायेगी.

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