Opinion

22 साल पहले मीडिया के लिए मोनिका एक प्रोडक्ट थी, आज रिया चक्रवर्ती

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Apoorv Bhardwaj

मैं रिया को नहीं जानता हूं. मैं मोनिका लेविंस्की को भी नहीं जानता था. मैं उन्हें तभी जान पाया जब मीडिया ने उनके बारे में बताया. मीडिया मोनिका का भी रिया के जैसे चरित्रहरण कर रहा था. तब अमेरिका का कानून भी भारत के कानून की तरह धृतराष्ट्र बना सब देख रहा था.

मैं नहीं जानता कि रिया दोषी है कि नहीं. मैं यह भी नहीं जानता था कि मोनिका दोषी थी कि नहीं. लेकिन मैं यह जानता हूं कि मोनिका के साथ जो मीडिया और ऑनलाइन व्याभिचार हुआ, वो पिछली सदी का सबसे बड़ा ऑनलाइन व्याभिचार था. वर्ष 1998 में, डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों और मीडिया ने राष्ट्रपति क्लिंटन को बचाने के लिए जो ऑनलाइन कैंपन चलाया था, वो बहुत ही घटिया और शर्मनाक था.

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मैं उन दिनों कॉलेज में था. यार लोग चटखारे ले-लेकर मोनिका लेविंस्की पर फब्तियां कसते थे. एक 20 साल की लड़की, जो अपनी इंटर्नशिप कर रही थी. उसका शारीरिक शोषण राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है. लेकिन मीडिया और इंटरनेट पर उसे बार-बार दोहराया जाता है.

मीडिया के लिए मोनिका एक प्रोडक्ट थी. जिसे उन्होंने खूब बेचा. वो हाड़-मांस की इंसान नहीं थी. वो ऐसा टेबलॉयड थी, जिसकी प्रतियां आते ही बिक जाती थी. मीडिया समाज की नब्ज जान चुका था. वो वही परोस रहा था, जो समाज देखना और सुनना चाह रहा था.

राजकुमारी डायना के साथ भी यही हुआ था. मीडिया से बचते-बचते उनकी जान चली गई. मोनिका बहादुर थी वो खूब लड़ी और आज ऑनलाइन उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष कर रही है.

मुझे नहीं पता रिया कितनी बहादुर है. लेकिन एक बात तो तय है कि वो लड़ेगी और उसे लड़ना ही होगा. क्योंकि उसका सामना एक ऐसे शिकारी से है, जो अपने शिकार के मरने के बाद भी उसकी सरेआम बेशर्मी से नुमाइश करके बेचता है.

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दुनिया में न्यायालय इसलिए बनाए गए हैं. ताकि वहां सबको इंसाफ़ मिले. लेकिन जब न्यायालय से पहले ही समाज न्याय करने लग जाये. तो समझ जाईये कि सभ्य समाज के खत्म होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है.

 

डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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