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15 करोड़ खर्च कर आम जनता को मोदी का पीएमजेएवाई पत्र विवाद में, विपक्ष कह रहा चुनावी हथकंडा

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 NewDelhi : 2019 लोकसभा चुनाव से पूर्व देश भर में करोड़ों परिवारों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लेकर एक व्यक्तिगत पत्र प्राप्त हो रहा है. बता दें कि पीएम जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) सरकार का सबसे बड़ा वित्त पोषण स्वास्थ्य कार्यक्रम है. एनडीटीवी के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा 15.75 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 7.5 करोड़ पत्र छापे गये हें, जो आम जन को भेजे गये हैं. प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना नामक एक लिफाफे में बड़े करीने से मुड़ा हुआ दो पेज वाला पत्र, मोदी सरकार की अन्य प्रमुख योजनाओं के विवरण के साथ भेजा गया है.  लेकिन पत्र भेजे को विपक्षी दल चुनावी लाभ के लिए राजनीतिक नौटंकी करार दे रहे हैं और इसका विरोध कर रहे हैं.  बता दें कि पत्र में मोदी ने लिखा है, मैंने अपने जीवन में गरीबी को बहुत करीब से अनुभव किया है. गरीबों के उत्थान का सबसे अच्छा तरीका उन्हें सशक्त बनाना है. जब से लोगों ने मुझे पीएम चुना है और मुझे उनकी सेवा करने का अवसर दिया है, मेरा प्रयास रहा है गरीबों, आम लोगों और महिलाओं को सशक्त बनाने,  घर बनाने से लेकर आय सृजन तक, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक मुहैया कराने जैसे कदम उठाये है.

पीएम ने पत्र में अपना संदेश स़्थानीय भाषाओं में दिया है. बता दें कि पत्र में प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जैसी कई योजनाओं के लाभों की जानकारी दी गयी है.

  प्रधानमंत्री के पत्र सीधे नागरिकों को भेज दिये गये, यह चुनाव प्रचार है

एनडीटीवी के अनुसार आयुष्मान भारत के सीईओ इंदु भूषण जानकारी दी कि पत्र के प्रकाशन की राशि का खर्च प्रशासनिक व्यय के रूप में बिल किया गया था. यह भी कहा कि इस योजना के तहत रोगियों के लिए आवंटित बजट बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुआ है.  लेकिन वामपंथियों का आरोप है कि मई में राष्ट्रीय चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री का पत्र सीधे नागरिकों को भेज दिया गया है, यह चुनाव प्रचार है.  प्रधानमंत्री स्वास्थ्य बीमा लाभार्थियों को संबोधित करने के लिए बने एक पत्र में केंद्र सरकार की योजनाओं के बारे में बात की जा रही है. पत्र  स्पीड पोस्ट से भेजे जा रहा है. आरोप लगाया कि प्रत्येक लिफाफे की लागत 40 रुपये तक हो सकती है.  कहा कि स्वास्थ्य बीमा का बजट लगभग 2,000 करोड़ रुपये है. ऐसे में यह पैसा कहां से आ रहा है. सीपीएम सांसद एमबी राजेश ने यह बात कही. लेकिन आयुष्मान भारत के सीईओ इंदु भूषण इन आरोपों से इनकार करते हुए कहते हैं. यह चुनावी नौटंकी नहीं हैं. कहा कि वास्तव में इन पत्रों के कारण ही विभिन्न राज्यों में अधिकांश लोग इस योजना के लाभ से अवगत हैं.  हमारे पास ऐसे लोग पत्र प्राप्त करने के बाद ही इलाज के लिए आये.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी योजना से बाहर हुईं

कहा जा रहा है कि इन पत्रों ने ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस माह की शुरुआत में आयुष्मान भारत येाजना से बाहर निकलने के लिए उकसाया था.  पश्चिम बंगाल में भी, पीएम मोदी बंगाली में लिखे अपने हस्ताक्षरित पत्र से गरीबी के साथ अपने व्यक्तिगत संघर्ष के बारे में बात करते हैं.  बता दें कि बंगाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने एक नोट लिख कर इस संबंध में केंद्र सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां स्पष्ट कर दी.  बंगाल सरकार ने लिखा है कि हमारे लिए यह आश्चर्य है कि आपके मंत्रालय द्वारा जारी किये गये पात्रता पत्र / कार्ड में योजना के नाम का उल्लेख PMJAY के रूप में किया गया है, जो न केवल उक्त समझौता ज्ञापन के उल्लंघन का उल्लंघन है, बल्कि राज्य स्तर पर अनावश्यक भ्रम पैदा कर रहा है.  उपर्युक्त स्थिति के तहत, यह आपको सूचित करना है कि पश्चिम बंगाल सरकार तत्काल प्रभाव से आयुष्मान योजना को वापस ले रही है.  बंगाल ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को यह बात अपने पत्र में कही है.

इसका चुनाव से लेना देना नहीं : भाजपा

हालांकि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा का कहना है  चुनाव से इसका कोई लेना देना नहीं है. सरकार इसे एक आउटरीच कार्यक्रम के रूप में कर रही है और सरकार इसे लोगों तक ले जा रही है. अगर किसी को लगता है कि यह राजनीतिक है, तो यह इसलिए है क्योंकि सत्ता में होने पर उन्होंने धन का दुरुपयोग किया होगा. कहा कि करदाता के पैसे का उपयोग किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोगों तक लाभ पहुंचे.  भाजपा के सांसद वी मुरलीधरन ने कहा कि इसके बारे में अधिक लोगों को पता चल रहा है.  कहा कि वर्तमान में  इन योजनाओं के लिए धन को ज्यादातर इसलिए कम कर दिया गया क्योंकि लोग उनके बारे में जागरूक नहीं थे. इसलिए भारत सरकार ने जागरूकता अभियान चलाया.

केरल को 12 लाख लिफाफे मिले

राज्य सरकारों की सहमति के बिना लाभार्थियों को भेजे जा रहे इन पत्रों को लेकर कई गैर-भाजपा राज्य परेशान हैं.  केरल के एक अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया, आदेश बहुत स्पष्ट हैं, एक अक्षर को एकतरफा नहीं किया जाना चाहिए या वापस नहीं किया जाना चाहिए और वितरण प्रक्रिया उस दिन शुरू होनी चाहिए जब पत्र पहुंचते हैं.  कहा कि हमने रविवार को पहला बैच प्राप्त किया और उस दिन ही काम करना शुरू कर दिया.  सूत्रों ने बताया कि वामपंथी शासित केरल को लगभग 12 लाख लिफाफे मिले हैं.  राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में प्राप्तकर्ताओं में विष्णु नामक युवक भी शामिल है. उसने बताया किबुधवार को उनके घर पर एक पत्र पहुंचा, जिसमें परिवार के सभी लाभार्थियों का नाम था. विष्णु के अनुसार पत्र में पिछले कुछ वर्षों में लोगों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा किये गये कार्यों का विवरण भी था.

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