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कोरोना के बहाने मोदी का चुनावी डोज

Uday Chandra

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी वैक्सीन की पहली डोज लेकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं. टीका लेकर पीएम ने उन लोगों को संदेश दिया है जो स्वदेशी  वैक्सीन पर और भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता पर सवाल उठा रहे थे. को-वैक्सीन लेते समय पीएम की वेशभूषा और नर्स का चयन भी कई मायनों में अर्थपूर्ण है.

आत्मनिर्भर भारत का नारा भी बुलंद किया

बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जो वैक्सीन लगवाए, वो भारत बायोटेक की को-वैक्सीन है. प्रधानमंत्री ने कोवैक्सिन लगवाकर एक बड़ा संदेश दिया है. विशेषकर उन लोगों को जो इस वैक्सीन पर और भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता पर सवाल उठा रहे थे. उन्होंने सिर्फ वैक्सीन नहीं ली है, आत्मनिर्भर भारत का नारा भी बुलंद किया है. विपक्ष द्वारा इस वैक्सीन को मंजूरी दिए जाने पर काफी सवाल खड़े किए गए थे, साथ ही वैक्सीन की गंभीरता पर भी निशाना साधा गया था.

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दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी प्रयास करते हैं कि किसी भी समस्या के समाधान हेतु सबसे पहले उसके समग्र रूप को जाना जाए. उनका मत है कि समस्या के समाधान की शुरुआत उसे बेहतर तरीके से समझने के साथ होती है. वे हर कोण से समस्या एवं उसके संभावित समाधान पर चर्चा करते है. वे किसी भी कार्य एवं समस्या के लिए तदर्थ अथवा फौरी प्रयास करने के विरुद्ध रहते हैं एवं स्थायी एवं दीर्घकालिक समाधान की रणनीति बनाते हैं. उनके विचार में दूरदृष्टि के साथ योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने पर सफलता अवश्य मिलती है. वे स्पष्ट लक्ष्य, उद्देश्यों एवं कार्ययोजना के साथ अपना कार्य सम्पादित करते हैं. उन्होंने वैक्सीनेशन के लिए एक रणनीति बनाई और जिन्हें पहले जरूरत थी, उन लोगों तक उन्होंने पहले वैक्सीन पहुंचाया. उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्करों की चिंता पहले की. वो चाहते तो प्रचार पाने के लिए पहले वैक्सीन लगवा सकते थे. लेकिन वो जानते थे पहले टीका लेने पर भी विपक्ष शोर मचाएगा, इसलिए उन्होंने अपनी बारी का इंतजार करना उचित समझा.

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…और पीएम बिना रूट के सुबह-सुबह पहुंच गये एम्स

पीएम बिना रूट के सुबह-सुबह एम्स गए ताकि, आम लोगों को परेशानी न हो. जब मांग उठी थी कि सांसदों-विधायकों को पहले टीका लगाया जाए तो पीएम मोदी ने दो टूक कहा कि कोई क़तार न तोड़े. विपक्ष ने मांग की थी कि पीएम पहले टीका लगवाएं ताकि, इसकी सुरक्षा को लेकर भ्रम दूर हों. आज जब बारी आई तो पीएम ने सबसे पहले टीका लगवाया और वह भी भारत बायोटैक का. भारत बायोटेक की वैक्सीन को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे थे, पहले इसके तीसरे फेज के ट्रायल, फिर डाटा और उसके बाद सरकार से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिलने की प्रक्रिया को निशाने पर लिया गया था.

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अब पर्दे के पीछे क्या ?

ये तो थी उनकी रणनीति की सूझबूझ. लेकिन अब पर्दे के पीछे क्या कुछ है, उसे भी समझने की जरूरत है. मोदी जी को टीका देने वाली पुड्डुचेरी की सिस्टर पी निवेदा है और गले में असम का गमछा है. पुड्डुचेरी की नर्स ने टीका लगाया. पीछे खड़ी नर्स केरल की है. गले में असम का गमछा. वेशभूषा बंगाल की. सभी चुनावी राज्यों को संदेश. बहरहाल प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम से कोवैक्सीन को लेकर फैले संदेह को दूर करने में मदद मिलेगी और जिन लोगों में इसे लेकर हिचकिचाहट है अब वो उनके दिमाग से निकल जाएगी.

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