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मोदी ने ‘जनता के राष्ट्रपति’ एपीजे अब्दुल कलाम को किया याद, कहा- देश के विकास में उनके योगदान को भारत कभी नहीं भूल सकता

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  • आज 88वीं जयंती है पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की

New Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ‘मिसाइल मैन’ के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किये. मोदी ने कहा कि चाहे वह वैज्ञानिक के रूप में हों या राष्ट्रपति के रूप में, राष्ट्र कभी उनके योगदान को नहीं भूल सकता.
देश के 11वें राष्ट्रपति रहे अबुल पाकिर जैनुलाआबदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम शहर में हुआ था. आज उनकी 88वीं जयंती है.

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प्रधानमंत्री ने किया ट्वीट

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर ट्वीट कर कहा, ‘‘डॉ कलाम को उनकी जयंती पर नमन. चाहे वह एक वैज्ञानिक के रूप में हों या राष्ट्रपति के रूप में, देश के विकास में उनके योगदान को भारत कभी भूल नहीं सकता. उनके जीवन का सफर लाखों लोगों को प्रेरणा देता रहेगा.’’

वीडियो भी किया साझा

इस ट्वीट के साथ ही मोदी ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वह कलाम से जुड़ी यादों की चर्चा और उनके जीवन से मिलनेवाली सीख के बारे में बता रहे हैं.
कलाम को उनकी साधारण जीवनशैली के लिए भी याद किया जाता है. उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जनता के लिए खोले. उन्हें ‘जनता का राष्ट्रपति’ भी कहा जाता है.

अमित शाह ने भी किया ट्वीट, कहा- कलाम दूरद्रष्टा नेता थे, जो एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत देखना चाहते थे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे कलाम को उनकी जयंती पर याद करते हुए गुरुवार को कहा कि वह ऐसे दूरद्रष्टा नेता थे, जिन्होंने हमेशा एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना चाहा.

शाह ने ट्वीट कर कहा, ‘‘भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर स्मरण कर रहा हूं. वह ऐसे दूरद्रष्टा नेता और भारत के अंतरिक्ष और मिसाइल कार्यक्रम के प्रणेता थे, जिन्होंने हमेशा एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना चाहा. विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी अमिट विरासत प्रेरणा का सारसंग्रह है.’’

उल्लेखनीय है कि भारत ने 1998 में जब पांच परमाणु परीक्षण किये थे तब डॉ कलाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के महानिदेशक थे और इस नाते वह परमाणु परीक्षण कर रही टीम का नेतृत्व कर रहे थे. पोखरण में 1974 में किये गये पहले परीक्षण के बाद 1998 में दूसरी बार परीक्षण किया गया था और उस समय केंद्र में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार थी.

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