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मोदी सरकार की नयी शिक्षा नीति देगी कॉरपोरेटाइजेशन को बढ़ावा, इसमें रिफॉर्म की जरूरत: डॉ रमेश शरण

Pravin Kumar

Ranchi: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नयी शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है. इसमें स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं. मोदी सरकार इसे भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक मील का पत्थर बता रही है.

वहीं शिक्षाविदों का एक वर्ग इसकी आलोचना भी कर रहा है. वे इसे एक तरह से शिक्षा की गुणवत्ता में कमी और निजीकरण करने की साजिश बता रहे हैं. उनका कहना है कि नयी शिक्षा नीति देश में शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर करेगी और गरीब जनता जिसका बड़ा तबका पहले से ही शिक्षा से बाहर है, उसे शिक्षा में समाहित करने के बजाये ये उन्हें शिक्षा से और दूर करेगी. नयी शिक्षा नीति में अभी बहुत ही रिफॉर्म की जरूरत है.

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री व विनोबा भावे विश्वद्यिालय के पूर्व कुलपति डॉ रमेश शरण का कहना है कि मोदी सरकार की नयी शिक्षा नीति राष्ट्रीय बहिष्करण नीति के अलावा कुछ नहीं है.

वह कहते हैं, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उपयोग लोगों को बेरोजगार करने के लिए किया जायेगा और यह शिक्षा के निजीकरण को बढावा देगी. देश की 80 फीसदी आबादी दलित, मुस्लिम, ओबीसी, आदिवासी और अति पिछड़ा वर्ग है. उनमें से ज्यादातर छात्र जो कक्षा एक में दाखिला लेते हैं वो 12वीं तक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते. जबकि ग्रामीण क्षेत्र के कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र आज भी 3000 रुपये परीक्षा शुल्क चुकाने में असमर्थ होते हैं. वोकेशनल कोर्स के नाम पर गरीब और निचले तबके के लोगों को मुख्यधारा से अलग करने की एक कोशिश है नयी शिक्षा नीति. स्किल इंडिया मिशन के बहाने ऐसे लोगों को कम दिहाड़ी की दुकानों पर मजदूरी करने के लिए धकेल दिया जायेगा. 12वीं अगर पास भी कर लेंगे तो डॉक्टर-इंजीनियर नहीं बन पायेंगे.”

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ऑनलाइन शिक्षा पर जोर उचित नही

डॉ शरण के अनुसार नयी शक्षिा नीति से प्राथमिक और उच्च शिक्षा में बहुत बदलाव होंगे. नयी शिक्षा नीति में ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया जायेगा. लेकिन देश की मौजूदा स्थिति ऐसी नहीं है कि ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा दी जा सके. देश में केवल 28 प्रतिशत वयस्कों के पास ही स्मार्टफोन हैं. यह नीति यह मानती है कि ज्यादातर स्कूल शहरी क्षेत्रों में हैं, जिन छात्रों के पास फोन और टैब तक पहुंच है.

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शिक्षा नीति 2020 में क्या है बेहतर

पूर्व कुलपति नयी शिक्षा नीति में कुछ अच्छी बातें भी पाते हैं. उनका कहना है, “इसमें लचीलापन दिखाई देता है. इस नीति के तहत शोध एवं अध्ययन के लिए कुछ खास संस्थान मजबूत होंगे, वहीं अन्य संस्थान टीचिंग के क्षेत्र में बेहतर बनाने की बात कही गयी है. वर्तमान में भारत के हर विश्वविद्यालय में रिसर्च कराये जाते हैं जबकि रिसर्च के लिए वहां लैबोरेट्री एवं अन्य सुविधाओं का अभाव है. ऐसे में रिसर्च करने योग्य संस्थाएं रिसर्च करेंगी, यह शिक्षा नीति में कहा गया है जो अच्छा है इससे गुणवत्ता बेहतर होगी.

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