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मोदी सरकार का फैसला- सवर्णों को नौकरी और शिक्षा में मिलेगा 10% आरक्षण

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New Delhi: मोदी सरकार ने सवर्णों को 10% आरक्षण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बीजेपी सरकार के इस फैसले के बाद गरीब सवर्णों के लिए सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण मिल सकेगा. सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया.

केंद्र सरकार आरक्षण के इस नया फार्मूला को लागू करने के लिए आरक्षण का कोटा बढ़ाएगी. बता दें कि भारतीय संविधान में आरक्षण के लिए आय को आधार मानने का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है. ऐसे में सरकार के पास गेमचेंजर माने जा रहे मूव को अमलीजामा पहनाने के लिए संविधान संशोधन ही एकमात्र रास्ता है.

लोकसभा में मंगलवार को होगी चर्चा, भाजपा ने जारी किया विह्प

मंगलवार को लोकसभा में सामान्य वर्ग के आर्थिक पिछड़ों को 10 फीसदी आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फैसले पर गहन चर्चा हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक सरकार इस आदेश को मंजूरी दिलाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है. बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को लोकसभा में मौजूद रहने के लिए विह्प जारी किया है. इसके साथ ही विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सांसदों से मौजूद रहने को कहा है.

क्या है आरक्षण का नया फार्मूला

जानकारी के अनुसार आरक्षण का कोटा मौजूदा 49.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 59.5 प्रतिशत किया जाएगा. इसमें से 10 फीसदी कोटा आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए होगा. बता दें कि लंबे समय से आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग की जा रही थी. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जिन लोगों की पारिवारिक आय 8 लाख रुपये सालाना से कम है उन्हें ही इसका फायदा मिलेगा. हालांकि अभी तक इसकी अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है.

लोकसभा चुनाव में मिलेगा फायदा?

बता दें कि बीते दिनों एससी/एसटी ऐक्ट पर मोदी सरकार के फैसले के बाद सवर्ण जातियों में नाराजगी और हाल के विधानसभा चुनाव में तीन राज्‍यों में मिली हार के मद्देनजर इसे सवर्णों को अपने पाले में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है.

सबसे बड़ा सवाल

केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों के लिए 10 फीसदी कोटे का प्रस्ताव तो पास कर दिया है, लेकिन इसे लागू करवाने की डगर अभी काफी मुश्किल है.  सरकार को इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा.  इसके लिए उसे संसद में अन्य दलों के समर्थन की भी जरूरत होगी.

नया नहीं है सवर्णों को आरक्षण देने का मुद्दा

1991 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया था. हालांकि, 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया. बीजेपी ने 2003 में एक मंत्री समूह का गठन किया. हालांकि इसका फायदा नहीं हुआ और वाजपेयी सरकार 2004 का चुनाव हार गई. साल 2006 में कांग्रेस ने भी एक कमेटी बनाई जिसको आर्थिक रूप से पिछड़े उन वर्गों का अध्ययन करना था जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के दायरे में नहीं आते हैं. लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ.

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