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‘हरित क्रांति’ को हराने की घिनौनी साजिश है मोदी सरकार का कृषि बिल : कांग्रेस

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Ranchi  :  मोदी सरकार के लाये कृषि संबंधी तीनों बिल को प्रदेश कांग्रेस ने हरित क्रांति’ को हराने की घिनौनी साजिश करार दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्य़क्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा है कि मोदी सरकार ‘कोरोना महामारी’ की तरह है, जो खेती-किसानी के लिए जानलेवा साबित हो रही है. नयी कृषि नीति से देश की ‘कृषि उपज खरीद व्यवस्था’ पूरी तरह नष्ट हो जायेगी. तीनों अध्यादेश ‘संघीय ढांचे’ पर सीधे-सीधे हमला हैं. इससे किसानों को न तो ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ मिलेगा और न ही बाजार भाव के अनुसार फसल की कीमत. उन्होंने कहा कि इसका जीता जागता उदाहरण भाजपा शासित बिहार है.

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साल 2006 में अनाज मंडियों को खत्म कर दिया गया. आज बिहार के किसान की हालत बद से बदतर है. किसान की फसल को दलाल औने-पौने दामों पर खरीदकर दूसरे प्रांतों की मंडियों में मुनाफा कमा एमएसपी पर बेच देते हैं. अगर पूरे देश की कृषि उपज मंडी व्यवस्था ही खत्म हो गयी, तो इससे सबसे बड़ा नुकसान किसान-खेत मजदूर को होगा. और सबसे बड़ा फायदा मुट्ठीभर पूंजीपतियों को. प्रदेश अध्यक्ष ने यह बातें कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कही. इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम उपस्थित थे.

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मंडी प्रणाली नष्ट होते ही सीधा प्रहार किसानों पर

 

उन्होंने कहा कि नयी कृषि नीति को लेकर मोदी सरकार का यह दावा है कि अब किसान अपनी फसल देश में कहीं भी बेच सकता है. जो कि पूरी तरह से सफेद झूठ है. इस कृषि नीति से देश की मंडी प्रणाली नष्ट होते ही सीधा प्रहार स्वाभाविक तौर से किसान पर होगा. मंडियां खत्म होते ही अनाज-सब्जी मंडी में काम करने वाले लाखों-करोड़ों मजदूर, ट्रांसपोर्टरों, सेलर आदि की रोजी-रोटी और आजीविका अपने आप खत्म हो जाएगी.

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‘शांता कुमार कमेटी’ की रिपोर्ट की आड़ में एमएसपी को खत्म करने की साजिश

उन्होंने कहा कि अध्यादेश की आड़ में मोदी सरकार असल में ‘शांता कुमार कमेटी’ की रिपोर्ट लागू करना चाहती है. ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म किया जा सके. इसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव खेत खलिहान पर पड़ेगा. रामेश्वर उरांव ने कहा कि अध्यादेश के माध्यम से किसान को ‘ठेका प्रथा’ में फंसाकर उसे अपनी ही जमीन में मजदूर बना दिया जाएगा.

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग अध्यादेश की सबसे बड़ी खामी तो यही है कि इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी देना अनिवार्य नहीं है. जब मंडी व्यवस्था खत्म होगी तो किसान केवल कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर निर्भर हो जाएगा और बड़ी कंपनियां किसान के खेत में उसकी फसल की मनमर्जी की कीमत निर्धारित करेंगी.

केंद्र का मंत्र ,“किसानों को मात और पूंजीपतियों का साथ”.

कांग्रेस नेता आलमगीर आलम ने कहा कि देश का किसान और मजदूर सड़कों पर है. वहीं सत्ता के नशे में मदमस्त मोदी सरकार उनकी खेत और रोटी को मुट्ठी भर पूंजीपतियों के हवाले करने में लगी है. कृषि विरोधी तीन काले कानूनों ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ की झूठ और उसका पर्दा मोदी सरकार के चेहरे से उठा दिया है. अब मोदी सरकार का नया मूल मंत्र है,“किसानों को मात और पूंजीपतियों का साथ”. “खेत मजदूरों का शोषण और पूंजीपतियों का पोषण”. “गरीबों का दमन और पूंजीपतियों को नमन”.

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