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मोदी सरकार आधार एक्ट में संशोधन की कवायद में, बैंक और मोबाइल कंपनियां मांग सकेंगे आधार!  

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार (26 सितंबर) को केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी आधार योजना को लेकर दिये गये फैसले की समीक्षा कर रही है. केंद्र सरकार अब आधार एक्ट में संशोधन करने की कवायद में है.

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NewDelhi :  मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार (26 सितंबर) को उसकी  महत्वाकांक्षी आधार योजना को लेकर दिये गये फैसले की समीक्षा कर रही है. केंद्र सरकार अब आधार एक्ट में संशोधन करने की कवायद में है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आधार संतुलित करार देते हुए इसकी संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है.  लेकिन इस क्रम में बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन और स्कूल में बच्चों के प्रवेश आदि के लिए आधार की अनिवार्यता संबंधी प्रावधान निरस्त करते हुए इसका दायरा सीमित कर दिया. खबर है कि केंद्र सरकार अब आधार एक्ट में संशोधन करने की सोच रही है. उसके बाद मोबाइल कंपनियों और बैंकों को आधार नंबर लेने की इजाजत दी जा सकती है. जिससे बेंक ग्राहकों की पहचान का काम तेजी से हो सके.

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 कानून बनाने या संशोधन करने की जरूरत महसूस होगी तो सरकार विकल्प चुनेगी

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के कुछ घंटे बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उन्होंने पूरा फैसला नहीं पढ़ा है, पर उनकी समझ है कि सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी आधार के अभाव में 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या की मोबाइल फोन कंपनियों आदि निजी इकाइयों प्रयोग पर रोक लगायी है.  कहा कि आधार कानून की धारा 57 (जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया) कहती है कि विशेष अधिकार के तहत अन्य इकाइयों को आधार के उपयोग की अनुमति दी जा सकती है.  सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि आधार संवैधानिक रूप से वैध है. लेकिन पीठ ने बैंक खातों को आधार से जोड़ने, मोबाइल फोन कनेक्शन तथा स्कूल में नाम लिखाने के लिए आधार की अनिवार्यता खत्म कर दी  कोर्ट ने अपने  निर्णय में इनकम टैक्स रिटर्न तथा स्थायी खाता संख्या (पैन) से आधार जोड़ने का प्रावधान बरकरार रखा है. बता दें कि इस फैसले के बाद आधार को बैंक खातों तथा मोबाइल फोन से जोड़ने की आवश्यकता के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा,  यह फैसले को बिना पढ़े पूछा गया प्रश्न है. जेटली ने कहा, पहले फैसला पढ़ने दीजिए.  दो-तीन क्षेत्र प्रतिबंधित हैं. क्या वे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं या उन्हें कानूनी समर्थन की जरूरत है. इसीलिए मैं सामान्य रूप से यही कहूंगा कि इन निजी इकाइयों के मामले में कानूनी समर्थन की जरूरत है. यदि कहीं नियम-कानून बनाने या संशोधन करने की जरूरत महसूस होगी तो सरकार विकल्प चुनेगी.

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