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बेलऑउट पैकेज से इनकार कर चुकी मोदी सरकार अब #BSNL और #MTNL को बंद करने की सोच रही

New Delhi: घाटे में चल रही सरकारी टेलीकॉम कंपनियां BSNL और MTNL को केंद्र की मोदी सरकार बंद करने के पक्ष में है. पौने दो लाख लोगों को रोज़गार देने वाली कंपनियां बंद हो रही है.

बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए 74 हजार करोड़ के बेलआउट पैकेज से पहले ही इनकार कर चुकी सरकार अब इसे बंद करने का सोच रही है.

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वित्त मंत्रालय ने घाटा झेल रही दोनों कंपनियों को बंद करने की सलाह दी है. क्योंकि कंपनी को बंद करने पर 95 हजार करोड़ की लगात का अनुमान है. ये लागत बीएसएनएल और एमटीएनएल को बंद करने पर 1.65 लाख कर्मचारियों को रिटायरमेंट प्लान देने और कंपनी का कर्ज चुकाने की स्थिति में आयेगी.

1.65 लाख कर्मचारियों की जायेगी नौकरी !

गौरतलब है कि दोनों सरकारी टेलीकॉम कंपनियों में तीन प्रकार के कर्मचारी हैं. एक वो, जिन्हें कंपनी द्वारा सीधे तौर पर नियुक्त किया जाता हैं.

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दूसरे वो कर्मचारी, जो दूसरी पीएसयू कंपनियों से या विभागों से बीएसएनएल और एमटीएनएल में शामिल किए गए हैं और तीसरी तरह के वो कर्मचारी इंडियन टेलीकम्यूनिकेशंस सर्विस (ITS) के अधिकारी हैं.

अगर बीएसएनएल और एमटीएनएल को बंद किया जाता है तो ITS अधिकारियों को दूसरे सरकारी कंपनियों में नौकरी दी जा सकती है.

जबकि कर्मचारी बीएसएनएल और एमटीएनएल द्वारा सीधे बहाल किए गए कर्मचारी जूनियर स्तर के हैं और उनकी तनख्वाह भी ज्यादा नहीं है और ये पूरे स्टाफ के सिर्फ 10% हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार ऐसे कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट दे सकती है, जिसमें कुछ लागत जरुर आएगी.

खबर है कि बीएसएनएल और एमटीएनएल को बंद करने के पीछे सरकार की सोच ये है कि टेलीकॉम इंडस्ट्री में जारी आर्थिक संकट के समय में कोई कंपनी शायद ही सरकारी कंपनियों में निवेश करने पर विचार करे.

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