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मोदी सरकार महंगाई का मुकाबला नफरत से करना चाहती है- दीपांकर

Koderma: 2024 में मोदी सरकार वापस आई तो देश में बचा खुचा लोकतंत्र संविधान और न्याय खत्म हो जाएगा. शांति का मतलब विरोध की हर आवाज को दबा देना है. गुजरात के चुनावी सभाओं में जिस तरह गृहमंत्री धमकी दे रहे हैं, यह देश के लोकतंत्र और न्याय पसंद जनता को खुली चेतावनी है. भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने सोमवार को झुमरीतिलैया के श्रमिक भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कन्वेंशन को संबोधित करते हुए कहा. उन्होंने आगे कहा कि गुजरात चुनाव में जनता के सवालों पर बात करने के बजाय धर्मिक ध्रुवीकरण किया जा रहा है. गृह मंत्री जी द्वारा यह कहना कि गुजराती महंगाई झेल लेंगे लेकिन रोहंगिया और बंगला देशी बर्दाश्त नहीं करेगें. यह पूरी तरह देश की जानता के साथ भद्दा मजाक है. मोदी सरकार महंगाई का मुकाबला नफरत से करना चाहती है. यह देश की विविधता और साझी विरासत पर हमला है. 2024 का चुनाव इस बार महंगाई, बेरोजगारी, भूखमरी जैसे सवालों की बजाय फिर से फासीवादी तरीके से मंदिर मस्जिद के नाम पर कराने की तैयारी शुरू हो गया है. अब तो चुनाव आयोग, आईएएस, आईपीएस, न्यायपालिका सब सरकार के दबाव में काम करेंगे. 2024 में मोदी से छुटकारा पाना है तो सभी पार्टियो को मिलाकर एक बड़ी गोलबंदी होनी चाहिए. बिना जन दबाव और आन्दोलनके कुछ भी संभव नहीं है. माले विधायक विनोद सिंह ने कहा कि समूह के साथ साथ सामुहिक पहल कदमी की जरुरत है. तानाशाही सरकार की जन विरोधी नीतियों से लड़ने के लिए पंचायत स्तर पर केन्द्र प्रायोजित योजनाओं से जुडे मानदेय कर्मियों को संगठित करना होगा. कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी के राज्य सचिव मनोज भक्त ने किया. पोलित ब्यूरो सदस्य जनार्दन प्रसाद ने पार्टी महाधिवेशन पर प्रकाश डाला. इस दौरान सभी जिला सचिवों ने अपने जिले की रिपोर्ट पेश की. मौके पर केंद्रीय कमिटी के शुभेदु सेन, गीता मंडल, पूर्व विधायक राजकुमार यादव, राज्य स्थाई कमेटी के सदस्य बीएन सिंह, सीता राम सिंह, मोहन दत्ता, भुवनेश्वर केवट, रविंदर भुइंया, देवकीनंदन बेदिया, भुनेश्वर बेदिया, राजेश यादव, उस्मान अंसारी, पूरन महतो, देवदीप सिंह, दिवाकर, राजेन्द्र मेहता, विजय पासवान आदि ने अपने विचार रखे.

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