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वन अधिकार पर शीर्ष न्यायालय के फैसले को लेकर अध्यादेश लाये मोदी सरकार : बंधु तिर्की

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Ranchi : झाविमो महासचिव बंधु तिर्की ने प्रेस बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार से शीर्ष न्यायालय के फैसले को लेकर अध्यादेश लाने का मांग की है. उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून 2006 की संवैधानिकता पर आया फैसला आदिवासियों के खिलाफ भाजपा सरकार का सबसे बड़ा हमला है. सरकार और संवैधानिक संस्थाओं ने ही अघोषित रूप से आदिवासियों और वनाश्रित समुदाय के लाखों लोगों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है. वन क्षेत्र में मौजूद खनिज संपदा को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करना चाहते हैं. सत्ता द्वारा इस अघोषित युद्ध के खिलाफ लड़ने के सिवाय आदिवासियों के पास कोई विकल्प नहीं है. दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में शायद ही ऐसा अनोखा फैसला आया होगा, जो लाखों लोगों को पारंपरिक निवास स्थान से बेदखल करने के लिए हो. यह वर्तमान सरकार की असंवेदनशीलता और कॉरपोरेटपरस्ती का सबूत है. बंधु ने कहा कि सरकार की असंवेदनशीलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह भी है कि इन लाखों लोगों का पक्ष रखने के लिए अपने वकील तक नहीं भेजे.

वन अधिकारियों को भयादोहन करने का मिल जायेगा बहाना

बंधु तिर्की ने कहा कि सरकारी वकील का मजबूती से पक्ष न रखना केंद्र सरकार की मौन सहमति की ओर इशारा करता है. फैसले के हफ्तों बाद भी सरकार का एक वक्तव्य भी नहीं आया. दूसरी ओर कॉरपोरेट फंड से संचालित स्वयंसेवी संगठन या एनजीओ की भी इन षड्यंत्रों में अहम भूमिका है. वन और वन्यप्राणियों की सुरक्षा करने का इनका अभियान ढोंग और दिखावा है. इनका मूल मकसद कॉरपोरेट जगत के लिए संसाधनों की लूट का रास्ता आसान बनाना है. लोगों को ऐसे संगठनों को चिह्नित करने की जरूरत है. फैसले के बाद झारखंड के 30 हजार आदिवासी परिवार की अजीविका पर संकट मंडराने लगा है और देश भर में इस फैसले की मार 20 लाख आदिवासी परिवारों पर पड़ेगी. वन अधिकारियों को वनों में निवास करनेवाली आबादी पर हमला करने, भयादोहन करने का बहाना मिल जायेगा.

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