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मोदी सरकार खुफिया अफसरों के माध्यम से  महबूबा मुफ्ती  और उमर अब्दुल्ला का रुख भांप रही है!

NewDelhi : केंद्र सरकार  घाटी में शांति और सद्भाव स्थापित करने के मकसद से राज्य दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को साधने की कोशिश में जुटी है.  सरकार चाहती है कि दोनों पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती  लोगों को समझाने में उसकी मदद करें.  टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार  केंद्रीय गृहमंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर के नजरबंद नेता उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती से  बीते दो दिनों के भीतर संपर्क साधने की कोशिश की है.

संपर्क खुफिया विभाग के अधिकारियों के द्वारा किया गया है.  मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि शनिवार को दोनों नेताओं से खुफिया विभाग के अधिकारियों ने बातचीत की.  हालांकि, आधिकारिक रूप से इस खबर को न तो खारिज किया गया है और न ही पुष्टि की गयी है.

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नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस रिपोर्ट को झूठ करार दिया है

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हालोंकि  उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस रिपोर्ट को झूठ करार दिया है.    पीडीपी के सूत्रों ने हालांकि बताया कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने दोनों नेताओं से हिरासत में मुलाकात की और उनसे रिहा होने की सूरत में जम्मू-कश्मीर में विशेष रूप से घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद करने को कहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार पीडीपी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि  दोनों नेताओं ने आर्टिकल 370 को रद्द करने के संसद के फैसले के खिलाफ अपने रुख से हटने से इनकार कर दिया.

नेशनल कॉन्फ्रेंस  के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा पांच अगस्त से नजरबंद हैं.  उमर अब्दुल्ला  को हरि निवास पैलेस में रखा गया है, वहीं महबूबा श्रीनगर में चेशमाशाही में जेके पर्यटन विकास हट में हिरासत में है. जान लें कि  उमर और महबूबा दोनों  जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति और दो केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य का पुनर्गठन किये जाने का विरोध कर रहे हैं

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