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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एक कदम आगे, मोदी सरकार सीमा शुल्क के ढांचे में बड़े बदलाव की कवायद में

मोदी सरकार सीमा शुल्क (कस्टम्स ड्यूटी) के ढांचे में बड़े बदलाव की कवायद में है. इसका मकसद देश की व्यापारिक गतिविधियों में तेजी लाने के साथ-साथ कोराबारी सुगमता में वृद्धि लाना है.

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 NewDelhi : मोदी सरकार सीमा शुल्क (कस्टम्स ड्यूटी) के ढांचे में बड़े बदलाव की कवायद में है. इसका मकसद देश की व्यापारिक गतिविधियों में तेजी लाने के साथ-साथ कोराबारी सुगमता में वृद्धि लाना है. बता दें कि सरकार अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में सबसे बड़ा सुधार कर चुकी है.  सीमा शुल्क के बदलाव में टैक्स अधिकारियों से आमने-सामने होने की नौबत खत्म करने, माल का स्वतः छुटकारा और नौवहन की ऑनलाइन निशानदेही की व्यवस्था प्रस्तावित है.  माना जा रहा है कि इन बदलावों से भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी पर लगाम कसने के साथ-साथ माल की तेज आवाजाही सुनिश्चित हो पायेगी. इस संबंध में सेंट्रल बैंक ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज ऐंड कस्टम्स के चेयरमैन एस रमेश ने इकनॉमिक टाइम्स के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कई बातें कहीं. कहा कि अब तक जो कर रहे थे, उससे बिल्कुल अलग करना है. उनके अनुसार फेसलेस असेसमेंट के नये क्षेत्र में नयी व्यवस्था की जा रही है. एक महीने में पायलट बेसिस पर शुरुआत कर दी जायेगी. उन्होंने कहा कि इसका मकसद वर्ल्ड बैंक के ईज ऑफ डूइंग बिजनस लिस्ट में 50वें स्थान पर आने की दिशा में काम करना है. बताया कि सीमा पार व्यापार के मामले में भारत 146वें से 80वें स्थान पर पहुंच चुका है. रमेश के अनुसार  बोर्ड इस बात पर विचार-विमर्श शुरू करेगा कि क्या इसके लिए नियम-कानूनों में बदलाव की भी जरूरत पड़ेगी.

जो माल मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर उतरेगा, उसका असेससमेंट चेन्नई में हो सकेगा

रमेश के अनुसार यह आदर्श स्थिति  होगी कि जो माल मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर उतरे, उसका असेससमेंट चेन्नई में किया जा सके.  अगर एक ही कैटिगरी का माल है, जैसे कि कारें, तो उनका असेसमेंट एक ही लोकेशन पर हो जाये.  रमेश ने कहा कि दुनिया इसी तरफ जा रही है. भारत में भी यह नयी व्यवस्था लागू हो गयी तो दिल्ली आने वाले माल का असेसमेंट चेन्नई में हो जायेगा. इसके लिए व्यापारियों को चेन्नई के कस्मट्स अधिकारियों के सामने नहीं जाना पड़ेगा.  असेसमेंट के बाद व्यापारी को ईमेल और एसएमएस से जानकारी दे दी जायेगी कि उनका माल रिलीज के लिए तैयार है, अब वह इसे ले जा सकते हैं.  लेकिन, ऐसी व्यवस्था भरोसेमंद व्यापारियों एवं कम जोखिम वाले माल के लिए ही लागू होगी. रमेश ने कहा कि भारत कैसे ईज ऑफ डूइंग बिजनस में बड़ी उछाल भर सकता है, इसके लिए अंदरूनी जोर-आजमाइश जारी है.    रमेश ने कहा कि वर्ष के आखिर तक अप्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है. कई राज्यों में राजस्व संग्रह में वृद्धि दर्ज की गयी है.

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