Opinion

मोदी सरकार ने खुलेआम वह कर दिखाया है, जो बीते 72 साल में नहीं हुआ!

Soumitra Roy

नरेंद्र दामोदरदास मोदी.

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याद कीजिये 2014 और 2019 का चुनाव.

बीजेपी और आरएसएस ने मिलकर इसी नाम में हवा भरी थी.

सशक्त, मज़बूत, तुरंत फैसला करने वाला, भ्रष्टाचार मुक्त नेतृत्व.

आज ये नेतृत्व कहां है?

आज भारतीय गणराज्य इस नेतृत्व की ओर कुछ कर दिखाने की उम्मीद में मुंह ताके बैठा है. लेकिन नेतृत्व खामोश है.

देश की इकोनॉमी डूब चुकी है. बाकी छोड़कर सिर्फ बिहार को देखें, जहां अमित शाह चुनावी रैली करेंगे तो पता चलेगा कि वहां बेरोज़गारी देश के औसत से दोगुनी है.

कोविड-19 का संक्रमण अभी तक चरम पर नहीं आया है. लॉकडाउन पर सवाल हो रहे हैं.

संक्रमण से निपटने के लिए स्वास्थ्य का ढांचा अभी तक तैयार नहीं है.

चीन ने पूर्वी लद्दाख में एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा जमा लिया है. नेपाल ने अपने नक्शे में भारत के इलाकों को भी जोड़ लिया.

देश की आर्थिक विकास दर नेगेटिव है. दुनियाभर में भारत की आर्थिक स्थिती की कमज़ोरी उजागर हो चुकी है.

लोकतंत्र की बात करें तो JNU, जामिया और दिल्ली के दंगों में केंद्र सरकार की सीधी भूमिका और विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं की फ़र्ज़ी मामलों में गिरफ्तारी ने डेमोक्रेसी का भी जनाज़ा निकाल दिया है.

पूरी दुनिया ने प्रवासी मज़दूरों के संकट का समाधान निकालने में सरकार की नाकामी को अपनी आंखों से देखा है.

तकरीबन हर रोज़ पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर लोगों को लूटा जा रहा है.

भ्रष्टाचार की क्या बात करें. बात चाहे मित्र उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने की हो, भगोड़े कर्जदारों को रिहा करने की या फिर पीएम केयर्स फण्ड बनाकर संगठित लूट की, इस सरकार ने खुलेआम वह कर दिखाया है, जो बीते 72 साल में नहीं हुआ.

इन सारे गंभीर मुद्दों पर प्रधानमंत्री चुप हैं. वे इन समस्याओं में से किसी को भी अगर स्वीकार करेंगे तो बीते 6 साल में उन्हें लेकर गढ़े गए सारे मिथक एक झटके में चकनाचूर हो जाएंगे.

यह भ्रम टूट जाएगा कि भारत का नेतृत्व एक शक्तिशाली प्रशासक के हाथों है.

दरअसल, भारत का नेतृत्व 72 साल में इतना कमज़ोर कभी नहीं था.

डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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