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Corona को लेकर झूठ बोलती रही मोदी सरकार, अप्रैल से ही हो रहा कम्युनिटी प्रसार, सरकारी दस्तावेज से हुआ खुलासा

New Delhi: मोदी सरकार भले ही कोरोना वायरस के कम्युनिटी प्रसार से इनकार कर रही हो लेकिन यह इस साल अप्रैल से ही देश के कई हिस्सों में हो रहा है. इस बात का खुलासा केंद्र सरकार के ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किये गये एक पेपर से हुआ है.

Jharkhand Rai

अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ‘द प्रिंट’ ने पिछले हफ्ते 4 जुलाई को जारी ‘गाइडेंस फॉर जेनरल मेडिकल एंड स्पेशलाइज्ड  मेंटल हेल्थ केयर सेटिंग्स’ नाम के दस्तावेज के हवाले से लिखा है, “इसके प्रकाशन के समय (अप्रैल 2020 की शुरुआत में) भारत कोरोना के सीमित कम्युनिटी स्प्रेड की स्टेज में है और किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं है कि कैसे यह महामारी फैल रही है.”

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केंद्र करता रहा है इनकार

कोरोना को लेकर झूठ बोलती रही मोदी सरकार, अप्रैल से ही हो रहा कम्युनिटी प्रसार, सरकारी दस्तावेज से हुआ खुलासाइस गाइडेंस डाक्यूमेंट में कोरोना ट्रांसमिशन को लेकर जो बात कही गयी है, वह केंद्र सरकार के दावों के विपरीत है. 11 जून, 2020 को कोरोना वायरस पर आखिरी सरकारी प्रेस ब्रीफिंग में 65 जिलों में किये गये पहले चरण के सेरो सर्वे के नतीजे जारी करते हुए आइसीएमआर ने कम्युनिटी में कोरोना के प्रसार की बात को सिरे से खारिज कर दिया था.

Samford

आइसीएमआर के डीजी डॉ बलराम भार्गव ने कहा था- ऐसे बड़े देशों में मौजूदा फैलाव बहुत कम है. छोटे जिलों में तो यह एक फीसदी से भी कम है, जबकि शहरों और कंटेनमेंट जोन्स में यह थोड़ा अधिक है. ऐसे में भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन तो बिल्कुल भी नहीं है. सर्वे के मुताबिक, उस समय तक देश की 0.73 फीसदी आबादी संक्रमित हुई थी.

‘द प्रिंट’ ने इस विषय पर स्वास्थ्य मंत्रालय का पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी.

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कम्युनिटी ट्रांसमिशन का मतलब

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जब पुष्ट मामले पकड़ में नहीं आते और वे बड़े स्तर पर संक्रमण की चेन को पॉजिटिव केस बढ़ाते हुए बनाते चले जाते हैं तो कम्युनिटी ट्रांसमिशन की पुष्टि होती है.

वहीं, यूएस सेंटर फॉर डिजीज एंड प्रिवेंशन के अनुसार, कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब होता है, जब पता ही नहीं चल पाता कि कौन संक्रमित है और वह कहां-कहां बीमारी को फैला रहा है.

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