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मोदी सरकार बना सकती है राम मंदिर निर्माण के लिए कानून: जस्टिस चेलमेश्वर

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Mumbai: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर ने शुक्रवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद मोदी सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सकती है. उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया द्वारा अदालती फैसलों में अवरोध पैदा करने के उदाहरण पहले भी रहे हैं.

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गौरतलब है कि न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक कानून बनाने की मांग संघ परिवार में बढ़ती जा रही है. कांग्रेस पार्टी से जुड़े संगठन ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (एआईपीसी) की ओर से आयोजित एक परिचर्चा सत्र में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी की.

मोदी सरकार बना सकती है कानून

शुक्रवार को परिचर्चा सत्र में जब पूर्व न्यायाधीश चेलमेश्वर से पूछा गया कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित रहने के दौरान क्या संसद राम मंदिर के लिए कानून पारित कर सकती है, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘यह एक पहलू है कि कानूनी तौर पर यह हो सकता है (या नहीं). दूसरा यह है कि यह होगा (या नहीं). मुझे कुछ ऐसे मामले पता हैं जो पहले हो चुके हैं, जिनमें विधायी प्रक्रिया ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों में अवरोध पैदा किया था.’’

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इस दौरान उन्होंने कावेरी जल विवाद पर उच्चतम न्यायालय का आदेश पलटने के लिए कर्नाटक विधानसभा द्वारा एक कानून पारित करने का उदाहरण दिया. साथ ही राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के बीच अंतर-राज्यीय जल विवाद से जुड़ी ऐसी ही एक घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘‘देश को इन चीजों को लेकर बहुत पहले ही खुला रुख अपनाना चाहिए था….यह (राम मंदिर पर कानून) संभव है, क्योंकि हमने इसे उस वक्त नहीं रोका.’’

संघ ने तेज की राम मंदिर की मांग

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर का ये बयानस उस वक्त आया है, जब संघ ने राम मंदिर बनाने की मांग को तेज कर दिया है. शुक्रवार को भी संघ के नेता भैयाजी जोशी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अब और देर नहीं करनी चाहिए. भैयाजी जोशी ने कहा था कि भगवान राम सभी के हृदय में रहते हैं लेकिन वो प्रकट होते हैं मंदिरों के द्वारा, हम चाहते हैं कि मंदिर बने, काम में कुछ बाधाएं अवश्य हैं और हम अपेक्षा कर रहे हैं कि कोर्ट हिंदू भावनाओं को समझ कर निर्णय देगा.

सीबीआई में उचित कानूनी ढांचे का अभाव

वही पूर्व न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर से सीबीआई में मचे हालिया घमासान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के लिए कभी कोई उचित कानूनी ढांचा तैयार नहीं किया गया. चेलमेश्वर ने कहा कि ‘‘किसी ने भी संगठन का कानूनी ढांचा जारी (परिभाषित) नहीं किया.’’

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पूर्व सीजेआई के कामकाज पर उठाये थे सवाल

उल्लेखनीय है कि इस साल की शुरुआत में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर उच्चतम न्यायालय के उन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल थे, जिन्होंने संवाददाता सम्मेलन कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कामकाज के तौर-तरीके पर सवाल उठाए थे. जिसके बाद विवाद काफी गहराया था.

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