न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

नोटबंदी के दो साल बाद मोदी सरकार ने माना, किसान हुए तबाह

कृषि मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा- नोटबंदी से किसानों की टूटी कमर

545

New Delhi: नोटबंदी के दो साल हो चुके हैं. लेकिन इसकी चर्चा अब भी जारी है. सरकार सरकार जहां इसकी उपलब्धियां बताने में जुटी है. वही विपक्ष जहां लगातार इसके नुकसान गिना रहा है. अब मोदी सरकार ने भी पहली बार माना है कि नोटबंदी का किसानों पर काफी बुरा असर हुआ है. कृषि मंत्रालय ने देश में अचानक 500-1000 के नोट बैन कर देने को हानिकारक माना है. वित्त मंत्रालय से जुड़ी पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी को सौंपी गई रिपोर्ट में कृषि मंत्रालय ने बताया कि नोटबंदी के कारण किसानों को काफी हानि हुई.

नहीं खरीद पाये खाद-बीज

8 नवंबर 2016 की रात पीएम मोदी द्वारा अचानक नोटबंदी की घोषणा करने से देश के किसानें खासे प्रभावित हुए. कृषि मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि बड़े नोट के बंद हो जाने से अचानक नकदी की भारी कमी हो गई. जिसके कारण किसान बीज-खाद नहीं खरीद सके. रबी और खरीफ के बीज खरीदने के लिए नकद की जरूरत होती है, लोकिन नोटबंदी के कारण किसान नकद नहीं जुटा पाये. जिससे अन्नदाताओं की कमर बुरी तरह टूट गई.

नोटबंदी के असर पर एक रिपोर्ट भी कृषि मंत्रालय ने संसदीय समिति को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में कृषि मंत्रालय ने ये भी बताया कि कैश की कमी के चलते राष्ट्रीय बीज निगम के करीब 1लाख 68 हजार क्विंटल गेंहूं के बीज बिक ही नहीं सके. हालांकि हालात बिगड़ता देख सरकार ने बीज खरीदने के लिए पुराने नोटों के इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी थी. लेकिन रिपोर्ट में यह बताया कि पुराने नोट के इस्तेमाल की इजाजत के बाद भी बीज की बिक्री में तेजी नहीं आ पाई.

श्रम मंत्रालय ने नोटबंदी की तारीफ की

एक ओर कृषि मंत्रालय ने नोटबंदी को किसानों की कमर तोड़नेवाला बताया. वही श्रम मंत्रालय ने समिति के समक्ष नोटबंदी की तारीफ करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बड़े नोट के बंद होने के बाद तिमाही में रोजगार के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.

इसे भी पढ़ेंःसमरेश सिंह की राजनीतिक सल्तनत का नया चेहरा होंगे बेटे संग्राम सिंह, धनबाद लोकसभा क्षेत्र से करेंगे दो-दो हाथ

इसे भी पढ़ें- बकोरिया कांड : सीबीआई ने दर्ज की प्राथमिकी, स्पेशल क्राईम ब्रांच-दिल्ली करेगी जांच

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: