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मॉब लिंचिंग : सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन तो हो रहा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं हो रहा पालन

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  • फास्ट ट्रैक कोर्ट में छह माह में करनी है सुनवाई
  • रामगढ़वाले मामले की सुनवाई में लगे नौ माह और लातेहारवाले मामले पर लगा एक साल
  • परिजनों को न मुआवजा मिला, न ही सरकारी नौकरी

Chhaya

Ranchi : पिछले कुछ सालों में राज्य में मॉब लिंचिंग की कई घटनाएं हुईं. इनमें से तीन मामलों में सुनवाई हो चुकी है, लेकिन कई मामले हैं, जो अब भी चल रहे हैं. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया कि मॉब लिंचिंग के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हो. साथ ही, फास्ट ट्रैक कोर्ट में ऐसे मामलों को छह माह में निबटायें. लेकिन, राज्य में ऐसा हुआ नहीं. लातेहार, रामगढ़ और बोकारो में इन मामलों के निष्पादन के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन तो किया गया, लेकिन इनमें से किसी भी मामले की सुनवाई छह माह में पूरी नहीं हुई. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में भी आदेश दिया था कि ऐसे मामलों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो, जिसके बाद पुनः 2018 में संशोधित आदेश जारी किया गया.

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मॉब लिंचिंग : सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन तो हो रहा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं हो रहा पालन

रामगढ़ मामले की सुनवाई में नौ माह लगे

रामगढ़ में अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या भीड़ ने कर दी थी. मॉब लिंचिंग की इस घटना की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन तो हुआ, लेकिन कोर्ट ने नौ माह के बाद निर्णय दिया. अलीमुद्दीन के पुत्र सहजाद अख्तर ने जानकारी दी कि मामले में 12 नामजद लोगों के खिलाफ सारे सबूत थे. वीडियो भी काफी वायरल हुआ. रामगढ़ व्यवहार न्यायालय ने 11 आरोपियों को उम्र कैद की सजा दी. वहीं, एक पर नाबालिग होने के कारण मामला चल रहा है. बाद में 11 आरोपियों ने हाई कोर्ट में अपील की, जहां से दो को छोड़ बाकी सभी लोगों को बरी कर दिया गया. सहजाद ने बताया कि कोर्ट और पुलिस के पास इस संबंध में सारे सबूत थे. वीडियो भी थे, लेकिन फिर भी आरोपियों को बरी कर दिया गया.

लातेहार की घटना में फास्ट ट्रैक के बावजूद लगा एक साल

लातेहार जिला के बालूमाथ प्रखंड में भीड़ ने इम्तियाज खान और मजलूम असांरी की हत्या कर दी थी. घटना 17 मार्च 2016 की है. मजलूम अंसारी के भाई मुनव्वर अंसारी ने बताया कि यह मामला एक साल लातेहार व्यवहार न्यायालय में चला. इसके बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया और फिर सुनवाई होने में एक साल का समय लगा. मुनव्वर ने बताया कि भले ही लातेहार में आठ आरोपियों को सजा सुनायी गयी हो, लेकिन फिर से हाई कोर्ट में अपील करने की तैयारी है, जिसके बाद शायद सभी लोग जमानत ले सकेंगे.

नहीं मिला मुआवजा

हालांकि, लातेहार व्यवहार न्यायालय ने इम्तियाज खान और मजलूम अंसारी की हत्या के दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनायी हो, लेकिन इसके साथ ही परिजनों को 25-25 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया था. मामले की सुनवाई दिसंबर 2018 में पूरी हुई, लेकिन अब तक पीड़ित परिजनों को मुआवजे की यह राशि नहीं मिली है. इम्तियाज की मां नाजमा बीबी ने बताया कि सरकार की ओर से कहा गया था कि परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जायेगी, लेकिन अब तक न नौकरी मिली और न ही मुआवजा राशि मिली.

इन मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट भी गठित नहीं

गिरिडीह, गढ़वा, गोड्डा, सरायकेला-खरसावां में हुई मॉब लिंचिंग के मामले अब तक लंबित हैं. इन मामलों में फास्ट ट्रैक का भी गठन नहीं किया गया है.

अब तक राज्य में हुईं घटनाएं

2016 के बाद से राज्य में मॉब लिंचिंग की घटनाएं ज्यादा हुईं. लातेहार के बालूमाथ प्रखंड में 17 मार्च 2016 को मजलूम अंसारी और नाबालिग इम्तियाज खान की हत्या, चार अप्रैल 2017 को बोकारो चंद्रपुरा में शमसुद्दीन अंसारी की हत्या, 18 मई 2017 को जमशेदपुर में तीन युवकों की हत्या, 18 मई 2017 की रात को सरायकेला-खरसावां में राजनगर इलाके में बच्चा चोरी के नाम अन्य तीन युवकों की हुई हत्या, 29 जून 2017 को रामगढ़ में अलीमुद्दीन की हत्या, 14 जून 2018 को बनकट्टी में दो युवकों की हत्या समेत अन्य घटनाएं हैं.

झारखंड से हुई शुरुआत

थ्री सोसाइटी की 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 11 राज्यों में मॉब लिंचिंग 30 घटनाएं हो चुकी हैं, जिसकी शुरुआत झारखंड से हुई, ऐसा माना गया है.

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