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पलामू में जेसीबी से कराया जा रहा मनरेगा कार्य, मुखिया, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और मेठ पर FIR

Palamu: मनरेगा की योजनाओं में जेसीबी का इस्तेमाल पूर्णत: वर्जित है और इसके इस्तेमाल पर मनरेगा एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है, बावजूद लोग जेसीबी का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटते. ताजा मामला पलामू जिले के तरहसी प्रखंड के सोनपुरा पंचायत से सामने आया है. यहां वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा की 4 योजनाओं में जेसीबी का इस्तेमाल होने पर इस संबंध में कार्यकारी एजेंसी सोनपुरा पंचायत के मुखिया मृत्युंजय सिंह, तत्कालीन पंचायत सचिव निरंजन सिंह, ग्राम रोजगार सेवक उपेंद्र कुमार महिला मेठ सुचिता देवी और रानी देवी सहित अन्य के खिलाफ तरहसी थाना में प्रखंड विकास पदाधिकारी सच्चिदानंद महतो ने प्राथमिकी दर्ज कराई है. बीडीओ ने बताया कि अनुसंधान के क्रम में कई अन्य लोगों की भी संलिप्तता इसमें सामने आ सकती है. ऐसे में आरोपियों की संख्या बढ़ भी सकती है.

बताते चलें कि इस सिलसिले में कार्यालय जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, पलामू के पत्रांक 123/3.2.2022 के आधार पर मनरेगा कार्यों में अनियमितता पर कार्रवाई का निर्देश जारी किया गया था.

क्या है मामला?

दरअसल, वित्तीय वर्ष 2020-21 में दिनांक 26.6. 2020 को मनरेगा कार्यों (ऑनगोइंग) की सोशल ऑडिट टीम झारखंड के द्वारा तरहसी प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में सामाजिक अंकेक्षण दल द्वारा निरीक्षण किया गया था. दल के बीआरपी विकास कुमार के प्रतिवेदन के आधार पर सोनपुरा पंचायत में मनरेगा की 4 योजनाओं में अज्ञात जेसीबी मशीन के द्वारा कार्य होने का रिपोर्ट किया गया था.

मनरेगा में जेसीबी से निर्माण है पूरी तरह वर्जित

मनरेगा के तहत संचालित योजनाओं में जेसीबी का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित है. सारी योजनाओं में कार्य मजदूरों से ही कराने का प्रावधान है. बावजूद पंचायत एजेंसी मुखिया, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, मेठ एवं अन्य ने जेसीबी का प्रयोग किया.

इन योजनाओं में हुआ जेसीबी का इस्तेमाल

तरहसी बीडीओ ने सोशल ऑडिट यूनिट के समवर्ती सामाजिक अंकेक्षण प्रतिवेदन के आधार पर दर्ज कराई प्राथमिकी में जिन चार योजनाओं में जेसीबी के इस्तेमाल की जानकारी दी है, उनमें दो मिट्टी मोरम पथ निर्माण और दो डोभा की योजनाएं शामिल हैं. बताया गया है कि सोनपुरा पंचायत में सतफेड़ी से सीडी तक मिटटी मोरम पथ निर्माण, नहर से लेकर बढका करण तक मिटटी मोरम पथ निर्माण के अलावा रैदका भइया की खेत में डोभा निर्माण एवं नमनारायण मिस्त्री के खेत में 60×60 आकार का डोभा निर्माण में जेसीबी का इस्तेमाल किया गया है.

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