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काम के प्रेशर से मनरेगाकर्मी हुआ ब्रेन हेमरेज का शिकार, सरकार कराये इलाज: संघ

Ranchi : लोहरदगा जिला के सेन्हा प्रखंड के अलौदी पंचायत के मनरेगाकर्मी  रोजगार सेवक विश्वनाथ भगत की तबियत शनिवार को अचानक बिगड़ गयी. जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया.  लेकिन हालत बिगड़ती देख 27 जून को रिम्स रेफर कर दिया गया. लेकिन अभी भी रोजगार सेवक की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. डॉक्टर रोजगार सेवक का ब्रेन हेमरेज होने की बात कह रहे हैं.

रोजगार सेवक की पत्नी का कहना है कि पति की ये हालत काम को लेकर प्रेशर बनाने की वजह से हुई है. वहीं बीडीओ एस महतो का कहना है कि मनरेगा के तहत कामगारों को रोजगार देने का सरकार की ओर से निर्देश है. तो ऐसे में वे सरकार के निर्देशों का ही पालन कर रहे थे.

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मनरेगा कर्मचारी संघ ने इलाज के लिए सीएम के लिखा पत्र

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वहीं पंचायत सेवक विश्वनाथ भगत के बेहतर इलाज के लिए झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. पत्र में संघ ने कहा है कि रोजगार सेवक 12 वर्षो से कार्यरत थे और 27 जून को अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें रांची रिम्स रेफर किया गया. रिम्स में जांच के दौरान उन्हें ब्रेन हेमरेज होने की बात कही गयी है.

पत्र में लिखा गया है कि फिलहाल विश्वनाथ भगत रिम्स में एडमिट हैं और उनकी आर्थिक स्थिती दयनीय है. परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं. निजी अस्पतालों में इलाज करने में 6 से 8 लाख का खर्च आयेगा, जिसे परिवार खर्च को उठाने में सक्षम नहीं है.

संघ की ओर से विश्वनाथ भगत के समुचित इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की गयी है. साथ ही कहा गया कि मनरेगाकर्मियों की सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सीय प्रावधान और अन्य सरकारी कर्मियों की तरह समान वेतनमान और स्थायीकरण की मांग भी की गयी.

 

पदाधिकारी फिक्स कर देते हैं टारगेट और शिकार होते हैं कर्मी – संघ

राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के महासचिव मो. इम्तेयाज, सचिव जॉन पीटर बागे, उपाध्यक्ष महेश सोरेन , अरविंद की ओर से संयुक्त बयान जारी कर कहा गया है कि मनरेगा कर्मियों पर काम के लिए ज्यादा दबाव बनाया जाता है. साथ ही कहा गया कि राज्य स्तरीय पदाधिकारियों की ओर से विभाग से ही टारगेट फिक्स कर दिया जाता है. जबकि हरेक ब्लॉक और पंचायतों की अलग-अलग प्रकृति होती है.

इस टारगेट के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर मनरेगा कर्मियों पर काफी दवाब दिया जाता है. जिसका नतीजा है कि कई कर्मी आये दिन दुर्घटना, ब्रेन हेमरेज के शिकार हो रहे हैं. जबकि कई तो आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं.

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