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मनरेगा योजना 2015-16  : राज्य स्तरीय सोशल ऑडिट आठ अक्टूबर को रांची में

मनरेगा योजना के तहत पंचायत, प्रखंड एवं जिला स्तर पर सोशल ऑडिट कर मनरेगा योजना में की गयी कई अनियमियताएं सामने लायी जा चुकी हैं.

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                                                                                संदर्भ : मनरेगा योजनाओं में अनियमियताएं

 Ranchi : मनरेगा योजना के तहत पंचायत, प्रखंड एवं जिला स्तर पर सोशल ऑडिट कर मनरेगा योजना में की गयी कई अनियमियताएं सामने लायी जा चुकी हैं. अब इन योजनाओं में, जिन पर अब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है, गड़बड़ी को लेकर राज्य स्तरीय सोशल ऑडिट का आयोजन 8 अक्टूबर को रांची में ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार के द्वारा किया जा रहा है. बता दें कि राज्य में अब तक ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा वर्ष 2015-16 में 534 ग्राम पंचायतों एवं प्रखंडों में सामाजिक अंकेक्षण कार्य किया जा चुका है.

इन जिलों के मामले शामिल होंगे सोशल ऑडिट में : जिन जिलों के मामले सोशल ऑडिट में शामिल हैं, उनमें रांची, गुमला, लोहरदगा, खूंटी, सिमडेगा, हजारीबाग, लातेहार, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, गिरिडीह और कोडरमा जिला शामिल है.

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किन मामलों में होगी राज्यस्तरीय जनसुनवाई

जिन मामलों में पंचायत और प्रखंड में विशेष सामाजिक अंकेक्षण किया गया है. उस क्रम में योजनाओं में गड़बड़ी को लेकर सामाजिक अंकेक्षण दल द्वारा किये गये सत्यापन को ग्राम सभा के आधार पर पंचायत समिति द्वारा  जिला स्तर पर की गयी कार्रवाई को प्रखंड प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुत किया गया. वैसे मामलों में जिला स्तर पर  समीक्षा के बाद कार्रवाई नहीं करने पर पुन: जांच कर कार्रवाई के आदेश दिये गये थे. अब वैसे मामलों की क्या स्थिति है, उसकी समीक्षा के लिए राज्य स्तरीय जनसुनवाई का आयोजन किया गया है.

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राज्य स्तरीय जनसुनवाई की प्रक्रिया क्या होगी

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राज्य स्तरीय जन सुनवाई के सात दिन पूर्व सभी जिलों की 2015-16 वर्ष की जिला स्तरीय जनसुनवाई की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से संपन्न करानी होती है. इसके बाद कार्रवाई प्रतिवेदन सोशल ऑडिट यूनिट को भेजा जाता है. राज्य स्तरीय जनसुनवाई में सोशल ऑडिट यूनिट द्वारा प्रत्येक जिले में संपन्न सोशल ऑडिट की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होती है. इसमें जिला प्रशासन का सहयोग, ऑडिट में आयी बाधाओं पर प्रतिवेदन रहता है. राज्य स्तरीय जनसुवाई के 15 दिनों के अंदर राज्य स्तरीय वार्षिक रिपोर्ट नियंत्रण और महालेखाकार और  राज्य रोजगार गारंटी परिषद को भेजी जाती है और इसे विधानसभा सत्र में रखा जाता है.

गयी थी. इसे बाद में ड्रॉप कर दिया गया.

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राज्य स्तरीय सोशल ऑडिट पैनल के सदस्य

ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सोशल ऑडिट के पैनल में विकास आयुक्त झारखंड सरकार, प्रधान महालेखाकार झारखंड, प्रधान सचिव ग्रामीण विकास विभाग, सचिव पंचायती राज झारखंड सरकार, श्रम आयुक्त झारखंड सरकार, प्रभारी सचिव मुख्यमंत्री जनसंवाद, मनरेगा आयुक्त झारखंड सरकार, विशेष ग्रामीण विकास विभाग सह सीईओ जेएसएलपीएस, जेम्स हेरेंज सदस्य राज्य संचालन समिति सोशल ऑडिट, प्रोफेसर रमेश शरण उप कुलपति विनोबा भावे विश्वविद्यालय, सदस्य संचालन समिति सोशल ऑडिट, बलराम सदस्य स्रोत समूह सोशल आडिट यूनिट, सभी जिलों के उप विकास आयुक्त सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा, संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, सोशल ऑडिट यूनिट के जिला स्तर एवं प्रखंड के स्रोत व्यक्ति, टीम लीडर सोशल ऑडिट यूनिट द्वारा चिन्हित राज्य समूह के सदस्य, सीएफटी लागू करने वाली संस्थाओं के सदस्य, नरेगा सहायता केंद्र के संचालक शामिल होंगे.

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