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मनरेगा : बकरी और मुर्गी का भी हक मार गये अधिकारी और बिचौलिये, डकार गये पौने तीन लाख रुपये

रांची के मांडर में बकरी और मुर्गी शेड निर्माण योजना में घोटाला, फर्जी बिल के जरिये निकाल ली गयी राशि

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Pravin Kumar
Ranchi : केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा जहां ग्रामीणों को रोजगार उपल्बध कराने के दृढ़ संकल्प के साथ शुरू हुई थी, वहीं इस योजना को दलालों और बिचौलियों ने गबन का हथियार बना लिया है. इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है. मनरेगा ऑपरेशनल गाइडलाइन 2013 में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के मकसद से बकरी शेड, मुर्गी शेड निर्माण की योजना मनरेगा में शमिल की गयी थी. रांची के मांडर प्रखंड की मांडर पंचायत में बकरी शेड निर्माण योजना में भारी गड़बड़ी का मामला समाने आया है, जो रघुवर सरकार के गांव के विकास के संकल्प पर प्रश्न चिह्न खड़ा करता है.

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बकरी और मुर्गी शेड निर्माण के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा

मांडर प्रखंड की मांडर पंचायत में ग्रामीणों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के मकसद से बकरी शेड, मुर्गी शेड और गाय शेड के निर्माण की योजना लाभुकों के नाम पर स्वीकृत की गयी थी. इसमें शेड निर्माण कार्य पूरा किये बिना ही योजना राशि का बड़ा हिस्सा फर्जी बिल के आधार पर निकाल लिया गया. पंचायत में बकरी और मुर्गी शेड की कुल 18 योजनाओं में 2 लाख 76 हजार 566 रुपये की निकासी कर ली गयी.

आठ लाख 74 हजार 15 रुपये की योजना में 2 लाख 76 हजार 566 रुपये का हुआ गबन

 

लाभुक का नाम                       योजना                  योजना व्यय (रुपये में)              फर्जी निकासी/बिल नं.
देवा उरांव                             बकरी शेड                  49086.75                             14397/157
संजय बाखला                        बकरी शेड                  51432                                  16900/1895
लिबु उरांव                            बकरी शेड                  49625                                  15819/158
पेत्रुस एक्का                          मुर्गी शेड                     51432                                  18866/1896
तेल्बा एक्का                         बकरी शेड                   30755                                   5429/2625
पासकल खलको                   गाय शेड                      51665                                  16648/2906
सका पहान                          बकरी शेड                   45849                                  15392/994
विमल खलखो                      बकरी शेड                   50240                                  16738/1897
हीरा उरांईन                        बकरी शेड                   49086                                   16847/2907
सूरज उरांव                         मुर्गी शेड                     49086                                   16847/2914
वाल्टर खलको                     मुर्गी शेड                     49625                                   15337/2913
शोभा खलखो                      मुर्गी शेड                     49525                                   15337/159
अजीत खलखो                    मुर्गी शेड                     49625                                    15337/2902
सुखदेव अक्का                   बकरी शेड                   49086                                    16897/2908
शिवरानी खलखो                 मुर्गी शेड                     49625                                    15337/2912
प्रसिका खलखो                   मुर्गी शेड                     49625                                    15337/
चम्पा उरांव                        मुर्गी शेड                     49625                                    15337/2901
काली देवी                         मुर्गी शेड                     49625                                     15337/2910

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एक योजना के लिए दो बिल किये गये स्वीकृत

मांडर पंचायत के लाभुक आनंद महतो के नाम पर गाय शेड निर्माण की योजना वर्ष 2016-17 में स्वीकृत की गयी थी, इसका योजना कोड 9010251799 है. इस योजना की कुल लागत 62 हजार रुपये स्वीकृत थी. वहीं योजना खर्च के बिल के रूप में 48 हजार पांच सौ 79 रुपये की बिल नं. 543 और 995 पांच अप्रैल 2017 और 15 मई 2017 की तरीख से निकासी की गयी, जो योजना लागत से अधिक है.

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बिना तकनीकी स्वीकृति के जेई ने खर्च की राशि, जेसीबी का भी हुआ इस्तेमाल

वर्ष 2016-17 में मांडर प्रखंड की मांडर पंचायत में मनरेगा के तहत स्वीकृत योजना में बिल के भुगतान के पूर्व जेई द्वारा बिना एमबी बुक भरे और योजना की तकनीकी स्वीकृति के ही योजना राशि खर्च कर दी गयी. इन योजनाओं में भी गड़बड़ी के सक्ष्य समाने आये हैं. वहीं, पंचायत में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में ठेकेदार के माघ्यम से जेसीबी द्वारा कार्य करने का मामला भी समाने आया है. वहीं, मांडर पंचायत में मनरेगा योजना में ठेकेदारी करनेवाले राजकिशोर राम उर्फ राजा द्वारा बीडीओ, मुखिया, पंचायत सेवक के नाम पर लाभुकों से राशि वसूलने की बात भी समाने आयी है.

मांडर पंचायत में इन योजनाओं में लाभुकों से वसूली जाती है राशि

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योजना का नाम                    लाभुकों से वसूली दर (रुपये में)
मुर्गी, बकरी शेड                     दो हजार
प्रधानमंत्री आवास योजना         10 हजार
कूप निर्माण                           10 हजार

बीडीओ, मुखिया और पंचायत सेवक पर लाभुक से पैसे वसूलने का आरोप

मनरेगा योजना में गड़बड़ी और सरकारी अधिकारी द्वारा योजना स्वीकृति के लिए लाभुकों से पैसे वसूले जाते हैं, यह कोई पहली घटना नहीं है. लेकिन, ग्रामसभा की बैठक में मांडर पंचायत के सुरेश महतो ने बीडीओ, मुखिया, पंचायत सेवक पर कुआं निर्माण योजना स्वीकृत करने के एवज में ग्रामसभा की बैठक में अरोप लगाया, जो सरकार की योजना की हकीकत बयां करता है.

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क्या कहते हैं मांडर बीडीओ

योजना में गड़बड़ी का मामला समाने आया है. इस पर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी. वहीं, फर्जी निकासी के मामले में राशि की रिकवरी की जायेगी.

गड़बड़ी करनेवालों पर होगी कार्रवाई : मनरेगा ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर

विनय कुमार गुप्ता, मनरेगा ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर, मांडर का कहना है कि 12 अप्रैल 2018 को उन्होंने प्रखंड में ज्वॉइन किया है. योजनाओं की गड़बड़ी के संदर्भ में उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन जिन्होंने भी गड़बड़ी की है, उन पर कार्रवाई की जायेगी.

गड़बड़ी उजागर होने के बाद प्रखंड में चल रहा है ‘सेटिंग’ का खेल

मांडर प्रखंड में संचालित मानरेगा योजना में घोटाले को बड़ी चालाकी से अंजाम दिया गया. वहीं, वर्तमान समय में गड़बड़ी पकड़े जाने पर उतनी ही चालाकी से बचने-बचाने का काम भी मामले में फंसे बिचौलिये और अधिकारी कर रहे हैं. योजना में घोटाले की शुरुआत आरंभिक चरण से ही हो चुकी थी. लाखों रुपये की बंदरबांट हो चुकी थी, लेकिन उनलोगों में से किसी पर कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है, जिनकी योजना को लेकर जवाबदेही बनती है. सभी की नौकरी भी जारी है. योजना में जब लूट हो रही थी, तो बीडीओ, बीपीओ, कनीय अभियंता (जेई) को छोड़ सिर्फ पंचायत सेवक, रोजगार सेवक और मुखिया पर कार्रवाई होती है, जबकि योजना सही रूप से लागू हो, इसका दयित्व वरीय अधिकारी पर भी है.

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