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झारखंड के विधायकों ने कहा – दिल्ली की तरह विधायक फंड हो 10 करोड़

दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने इसे सत्ता का विकेंद्रीकरण कहा है

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Subhash Shekhar

Ranchi :  दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने विधायक फंड सालाना चार करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया है. मंगलवार को दिल्ली कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि स्थानीय लोगों को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए विधायक के पास जाना पड़ता है. उनके पास अगर ज्यादा फंड होगा, तो छोटे काम आसानी से हो सकेंगे. दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने इसे सत्ता का विकेंद्रीकरण कहा है.

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राशि कम होने से विधायक के लिए कार्यों के क्षेत्र चुनने में होती है मुश्किल

दिलचस्प है कि झारखंड के कई विधायक भी इसका समर्थन कर रहे हैं. भले ही राजनीतिक कारणों से कई विधायक चुप हैं. दरअसल विधायक फंड के नाम पर मिलने वाली रकम इतनी कम है, जिससे किसी विधायक के लिए अपने पूरे क्षेत्र की जरूरतों को देखना बहुत मुश्किल होता है. जबकि हर नागरिक की जुबान पर विधायक फंड का नाम होता है. सबको लगता है कि विधायक फंड से कुछ भी करा लेंगे. यह राशि इतनी कम होती है कि विधायक के लिए यह मुश्किल होता है कि किस क्षेत्र को महत्त्व दें और किसे छोड़ दें.

यही कारण है कि झारखंड के विधायक भी समय-समय पर विधायक फंड बढ़ाने की मांग करते रहे हैं. लेकिन अब दिल्ली में विधायक फंड बढ़ाकर दस करोड़ कर देने से उन्हें एक अच्छा उदाहरण मिल गया है. हालांकि सत्ता पक्ष से जुड़े विधायक अनौपचारिक तौर पर यह बात कर रहे हैं. खुलकर इसका समर्थन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.

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न्यूज विंग ने झारखंड के पक्ष और विपक्ष के कुछ विधायकों से बात की

झामुमो विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने कहा है कि रघुवर सरकार विधायकों को विधायक फंड देने के लिए गंभीर नहीं हैं. अभी जन उपयोगी खर्च के लिए 4 करोड़ रूपये फंड मिलता है. कई महीनों से अभी तक चौथी किस्‍त भी नहीं दिया जा रहा है और इलाके में कई जरूरी काम भी लंबित हैं. रघुवर सरकार में ब्‍यूरोक्रेट्स हावी हैं. ऐसे में रघुवर सरकार से ज्यादा उम्‍मीद नहीं किया जा सकता है. विधायक फंड के मामले में सबसे बढ़िया मधु कोड़ा सरकार ने किया था, जो एक ही बार में तीन करोड़ कर दिया था. विधायकों को 10 करोड़ मिलने लगे तो विकास के बहुत सारे काम कराये जा सकते हैं.

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विपक्ष की भी राय कि बढ़े  विधायक फंड

कांग्रेस विधायक सह पूर्व स्‍पीकर आलमगीर आलम का कहना है कि झारखंड में सरकारी योजना के तहत बहुत सारी जनोपयोगी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा रहा है. गांव, मोहल्‍लों और कस्‍बों में पेयजल, सड़क व दूसरी बेसिक जरूरत के लिए बनी योजनायें सब जगह नहीं पहुंच पाती हैं. ऐसी समस्‍याओं को लेकर लोग विधायक के पास ही आते हैं. अभी जो फंड मिलता है, वह निश्चित तौर पर कम पड़ जाता है, ऐसे में सरकार को विधायक फंड बढ़ाने की जरूरत है. यह कितना बढ़ना चाहिये, इसपर सरकार निर्णय ले.

मासस विधायक अरूप चटर्जी ने इस बारे में कहा कि सीएम बनने से पहले रघुवर दास भी विधायक फंड बढ़ाने के लिए विधानसभा में हल्‍ला करते थे. आज जैसे ही वह मुख्‍यमंत्री बन बैठे हैं, वह अधिकारियों के होकर रह गये हैं. अधिकारी जैसा समझाते हैं, वैसा करने लगे हैं. उन्‍हें अधिकारियों ने यह समझा दिया है कि विधायकों के खर्च के लिए फंड बढ़ाने की जरूरत क्‍या है, सब कंट्रोल अपने पास रखिये. इधर महंगाई बढ़ गया है, विधायक फंड से सामुदायिक फंड के लिए पहले जो 1.80 लाख रुपये का खर्च होता था, उसके लिये आज 5 लाख से ज्‍यादा का स्‍टीमेट बनता है, ऐसे में निश्चित तौर पर विधायकों का फंड बढ़ना चाहिये.

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बसपा के विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता का इस बारे में कहना है कि  क्षेत्र के लोग विधायक फंड से किये गये काम को ही ज्‍यादा पसंद करते हैं. विधायक फंड से बनने वाले गांव-मोहल्‍लों की छोटी योजनायें उन्‍हीं की मांग पर और उन्‍हीं के द्वारा कराई जाती हैं. इसलिए उसमें बेहतर गुणवत्‍ता भी होती है. लेकिन पिछले कई सालों में महंगाई बढ़ गई है, इसलिए इनके लिए ज्‍यादा काम करना मुश्किल हो गया है. ऐसे में सरकार को विधायक फंड की राशि बढ़ाने की जरूरत है.

भाकपा माले विधायक राजकुमार यादव ने कहा कि निश्चित तौर पर झारखंड के विधायकों का विधायक फंड दिल्‍ली की तर्ज पर बढ़ना चा‍हिये. जनता हमारे पास हर काम के लिए आती है और हमसे ही उम्‍मीद करती है. इसकी कई बार मांग हमने विधानसभा सत्र में भी उठाया है.

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सत्ता पक्ष भी है इससे सहमत

वहीं भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने कहा है कि सिर्फ कहने को विधायक फंड के लिए 4 करोड़ मिलता है, इसमें से 12.5 प्रतिशत तो जीएसटी में कट जाता है, कुल मिलाकर जनहित योजनाओं के लिए 3.5 करोड़ ही खर्च होता है. क्षेत्र की जनता विकास कार्यों के लिए सीधे विधायकों से ही उम्‍मीद रखती है. सरकारी योजनाओं के अमलीजामा पहनने में वक्‍त लग जाता है, जबकि सड़क, नाली, पानी और दूसरी जरूरतों के लिए विधायक फंड से जल्‍दी पूरा हो जाता है. इसलिए झारखंड सरकार को भी विधायकों का फंड बढ़ाने पर ध्‍यान देना चाहिये.

भाजपा के धनबाद विधायक राज सिन्‍हा ने कहा कि विधायक फंड में बढ़ोत्तरी की मांग मुख्‍यमंत्री से लंबे समय से की जा रही है. जनता की जरूरतें भी बढ़ रही हैं और महंगाई भी बढ़ रहा है, इसलिए विधायकों के वेतन बढ़ोतरी से ज्‍यादा जरूरी विधायक फंड में बढ़ोतरी की है. इस बात से मुख्‍यमंत्री को हमलोग अवगत कराते रहे हैं, लेकिन वह विधायक फंड नहीं बढ़ा रहे.

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भाजपा के बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने कहा कि झारखंड के विधायकों का विधायक फंड 4 करोड़ से बढाकर 10 करोड़ होना चाहिये. इसकी मांग विधानसभा में कई बार की गयी. जनता किसी तरह के विकास योजना की जरूरत के लिए बीडीओ या डीसी के पास नहीं जाती है, वह हमारे पास ही आती है. इसलिए हमें ही सब काम अपने स्‍तर पर करना पड़ता है और पैसे कम पड़ जाते हैं. अब देखते हैं, मुख्‍यमंत्री इस दिशा में क्‍या निर्णय लेते हैं.

आजसू विधायक विकास मुंडा ने कहा कि विधायकों के अनुसंशित योजनाओं को त्‍वरित गति से धरातल पर लाया जाय तो अलग से विधायक फंड की जरूरत ही नहीं है. सरकार को इस दिशा में जोर देकर प्रयास करना चाहिये कि जनप्रतिनिधि के द्वारा अनुसंशा की गई, योजनाओं को प्राथमिकता के साथ न्‍यूनतम तय समय पर पूरा किया जा सके.

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