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पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मिले विधायक मनीष जायसवाल, रखी ये मांग…

HAZARIBAGH: सदर विधायक मनीष जायसवाल ने दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की और हजारीबाग क्षेत्र के किसानों, उद्यमियों के विकास और बेरोजगार युवाओं के रोजगार सृजन की दिशा में उनसे लंबी चर्चा की. चर्चा के दौरान विधायक मनीष जायसवाल ने इथेनॉल ब्लेंडिंग के बाबत विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विशेष जानकारी प्राप्त की और हजारीबाग सहित झारखंड के कृषि परिदृश्य को उनके समक्ष रखते हुए इस क्षेत्र में विशेष ध्यान आकृष्ट करने का आग्रह किया, ताकि किसानों की आय में वृद्धि, उद्यमियों को हर तरीके से मदद और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्राप्त हो सके.

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विधायक मनीष जायसवाल ने बताया कि हजारीबाग सहित समस्त झारखंड के किसानों का मुख्य व्यवसाय धान की खेती है. परंतु इसके साथ कई समस्याएं जुड़ी हुई है जैसे मात्र एक फसल होना साथ ही खरीद में अनियमितता, जिसके कारण किसान बिचौलियों के हाथों फस जाते हैं. जबकि मक्के की दो फसल होती है और प्रति एकड़ अगर फायदा देखा जाए तो यह तकरीबन 2 से 3 गुना हो सकती है धान की तुलना में. मक्के की फसल बेचने के लिए किसान की निर्भरता सरकार पर नहीं होगी.

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किसान मक्के की हर वर्ष दो फसलें ले सकता है और सीधे एथेनॉल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को फसल बेची जा सकती है. इसका दूसरा पहलू यह है कि इसके वेस्ट को कैटल फीड, फिश फीड इत्यादि के रूप में उपयोग किया जा सकता है जो एक प्रोटीन रिच प्रोडक्ट होता है.

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इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल होता है, जिसे पेट्रोल में मिलाया जाता है और फिर गाडिय़ों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है. इसके अलावा इथेनॉल का उत्पादन मक्का, चावल आदि शर्करा वाली अन्य फसलों से भी किया जा सकता है. इथेनॉल पर्यावरण के लिए बहुत अनुकूल है.

यह प्रदूषण कम करता है क्योंकि इसके इस्तेमाल से 35 प्रतिशत कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है. यह सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को कम करता है. इसमें 35 प्रतिशत ऑक्सीजन होता है. इथेनॉल फ्यूल को इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है.विश्व 25 तक इसकी उत्पादन 3 गुना करने का सरकार का लक्ष्य निर्धारित है.

केंद्र सरकार देश में इथेनॉल का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए सस्ती दरों पर लोन दे रही है. बीते कुछ महीने में कई इथेनॉल प्लांट को मंजूरी मिली है. ऐसे में एक और नौकरियां बढ़ेंगी वहीं, प्रोडक्शन बढ़ने से गन्ने का बकाया भुगतान भी तेजी से हो पाएगा. इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी .
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