JharkhandLead NewsRanchi

विधायक दीपिका पांडेय ने सरकार से की PARA TEACHERS की समस्याओं के निदान की मांग

शिक्षा मन्त्री जगन्नाथ महतो और सीएम से भी भेंट कर त्वरित कार्रवाई करने का किया आग्रह

Ranchi : मुख्यमन्त्री हेमन्त सोरेन की पहल पर राज्य में वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था समाप्त करने का फैसला लिया गया है. महागामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि यह एक निर्णायक कदम है. इससे वित्त रहित शिक्षा से जुड़े शिक्षकों और उनके परिवार को बड़ी राहत मिलेगी.
इसी तरह सरकार पारा शिक्षकों की समस्या के भी निदान के लिए जरूरी कदम उठाये गये हैं. वे मामूली मानदेय पर काम कर रहे हैं. दीपिका पांडेय ने इस सम्बन्ध में शिक्षा मन्त्री जगन्नाथ महतो और मुख्यमन्त्री से भी भेंट कर त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया है. उन्होंने उम्मीद जतायी है कि बहुत जल्द पारा शिक्षकों को भी अच्छी खबर सुनने को मिलेगी

इसे भी पढ़ें : जस्टिस सुभाष चंद्र ने झारखंड हाईकोर्ट के 20वें न्यायाधीश के रूप में ली शपथ

advt

विधानसभा में भी उठाया था मुद्दा

दीपिका पांडेय सिंह के अनुसार पिछले कई दशकों से वित्त रहित शिक्षा से जुड़े शिक्षक अर्थाभाव के बीच शिक्षादान कर रहे हैं. दशकों से इस व्यवस्था को समाप्त किये जाने की मांग चल रही थी. उन्होंने विधायक के रूप में वित्तरहित शिक्षकों का सवाल विधानसभा सत्र में भी उठाया था. 17 मार्च, 2021 को अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से इस प्रश्न को उन्होंने उठाया था.

मुख्यमन्त्री ने उस दौरान इस मामले में उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था. उन्होंने सीएम को पत्र लिखकर इस मामले को वरीयता के आधार निदान करने का आग्रह भी किया था. अब जबकि शिक्षा विभाग ने कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग को पत्र लिखकर नियमावली बनाने का आग्रह किया है, आशा है कि वित्त रहित शिक्षकों के हितों की अब सुरक्षा हो पायेगी.

शिक्षा विभाग ने कार्मिक को भेजे पत्र में उनके लिखे पत्र का उद्धरण दिया है. वित्त रहित शिक्षा से जुड़े शिक्षक पेशेवर रूप से उतने ही दक्ष और शिक्षा के प्रसार लिए उतने समर्पित हंत जितने की सरकारी शिक्षक. उन्हें अपनी सेवा के बदले वही सम्मान राशि मिलनी चाहिए जो सरकारी शिक्षकों को मिलता है.

झारखण्ड में वित्तरहित शिक्षण संस्थान का एक बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है और ऐसे शिक्षण संस्थानों की संख्या अनुमानतः 1250 है. इनमें हजारों शिक्षक कार्यरत हैं. ये शिक्षण संस्थान इंटरमीडिएट कॉलेज/ स्थापना अनुमति प्राप्त उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय एवं मदरसा विद्यालय हैं. वित्त रहित शिक्षकों की सरकार तरह पारा शिक्षकों की समस्या का भी निदान आवश्यक है.

इसे भी पढ़ें : News Wing Impact: सुखदेव नगर थाने की पुलिस ने न्यूज़ विंग की खबर के बाद दो लोगों को लिया हिरासत में, पार्टी में फायरिंग का मामला

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: