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विधायक भूषण बाड़ा ने अविनाश पांडेय से की जाति के आवेदन से धर्म का कॉलम हटवाने में पहल की अपील

Ranchi: सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने राज्य में आदिवासी ईसाई समुदाय के हितों के लिये चिंता जतायी है. आज कांग्रेस के झारखंड प्रभारी अविनाश पांडेय से मिल कर उन्होंने कहा कि अलग राज्य बनने के बाद से यहां भाजपा सरकार ने आदिवासी इसाई समुदाय को हमेशा निशाने पर रखा. भाजपा सरकार लगातार आदिवासी इसाई समाज को बर्बाद करने में लगी रही. 3 अगस्त, 2018 को टीएसी (झारखंड जनजातीय परामर्श दातृ परिषद) की 22वीं बैठक में भाजपा सरकार धर्म के आधार पर एसटी के रूप में दिये जाने वाले अधिकारों और लाभों से वंचित करने का प्रस्ताव लायी थी. इससे संबंधित निर्देश और नियम जारी किये थे जिसे वर्तमान सरकार से निरस्त कराएं. 2019 में नया जाति प्रमाण पत्र का प्रारूप तैयार करते इसमें धर्म का कॉलम जोड़ा. इस फॉर्मेट को भी कैंसिल किया जाये.

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ईसाई शिक्षण संस्थानों में हो शिक्षक बहाली

भूषण बाड़ा के मुताबिक राज्य में पूर्व की भाजपा सरकार के दौरान आदिवासी, इसाईयों के धार्मिक स्थलों, सभी तरह के शिक्षण संस्थानों पर सीएनटी एक्ट के उल्लंघन का हवाला देते हुए इसे अतिक्रमणमुक्त किये जाने का एकतरफा आदेश जारी किया गया था. यह संविधान के अनुच्छेद 15 के विरूद्ध था. इस आदेश को भी वर्तमान सरकार से निरस्त करायें. इससे आदिवासी इसाई शिक्षण संस्थानों  सभी धर्म के स्टूडेंट्स पढ़ाई कर सकेंगे. आदिवासी इसाई शिक्षण संस्थानों को बंद करने के उद्देश्य से स्वीकृत शिक्षक के पदों पर बहाली भाजपा सरकार ने रोक दी थी. इस आदेश को भी कैंसिल कर शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू हो.

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1932 का खतियान हो लागू

राज्य में भाजपा सरकार ने नियुक्तियों में 1985 का कट ऑफ डेट लागू कर दिया था. इससे नाराज लोगों ने रघुवर सरकार को हटाकर झामुमो कांग्रेस के हाथों में शासन सौंपा. राज्य हित में झारखंड में 1932 का खतियान लागू होना चाहिये. इससे राज्य में स्थानीय, मूलवासियों को सरकारी नौकरी, पढ़ाई और दूसरे फिल्ड में लाभ मिल सकेगा. टीएसी को मिनी एसेंबली का दर्जा दिया गया है. इसे और बेहतर करना होगा. सीएनटी, एसपीटीए, विल्किंसन रुल को कड़ाई से लागू किये जाने की जरूरत है. ट्राइबल को वन भूमि पर अधिक से अधिक अधिकार मिले, वन पट्टा मिले. खनन क्षेत्रों  में खनिजों पर आदिवसी रैयतों, पट्टेदारों को अधिकार मिले. इस संबंध में 1997 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश को राज्य में पारित कराना जरूरी है. वर्तमान राज्य सरकार भी इसके लिये तत्काल कदम उठाए.

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