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चान्हों किसान आत्महत्या मामला : MLA गंगोत्री कुजूर ने माना, लाभुकों को नहीं मिल रहा मनरेगा का पैसा

Ranchi : चान्हों के पतरातू गांव के किसान लखन महतो के आत्महत्या की वजह सरकार की जांच टीम ने उसके नशा करने की आदत को माना है, जबकि मांडर विधायक गंगोत्री कुजूर ने न्यूज विंग से बातचीत में स्वीकारा कि चान्हों के लाभुकों के बीच मनरेगा भुगतान नहीं हो रहा है.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर लाभुकों के बीच मनरेगा की राशि का भुगतान नहीं हो रहा है तो इसके लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी जिम्मेदार हैं. मनरेगा भुगतान न होने की बात सामने आती है तो उन पर निश्चित कार्रवाई होगी.

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26 लाभुकों को नहीं मिल रहा है मनरेगा का पैसा

विधायक गंगोत्री कुजूर ने माना लाभुकों को नहीं मिल रहा मनरेगा का पैसा
भुगतान नहीं होने सम्बन्धी कागजात.

जानकारी के मुताबिक चान्हों प्रखंड के पांच पंचायतों के 26 ऐसे लाभुक हैं, जिनकी मनरेगा राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है. इन पांच पंचायतों में पतरातू, रघुनाथपुर, बैयासी, चटवल व ताला शामिल हैं. इन 26 लाभुकों में केवल पतरातू पंचायत के 18 लाभुक हैं. किसान लखन महतो इसी पतरातू पंचायत के रहने वाला था.

रिश्तेदारों से 1.50 लाख कर्ज लेकर पूरा कराया था मनरेगा का कुआं

पतरातू गांव के रहने वाले लखन महतो के परिवार के सदस्यों व आसपास के लोगों ने बताया कि लखन महतो ने अपने कई रिश्तेदारों से 1.50 लाख रुपये कर्ज लेकर मनरेगा का कुआं पूरा कराया था. इस 1.50 लाख रुपये में से 30 हजार रुपये बहनोई निर्मल महतो से 30 हजार, साला हरि महतो से 80 हजार व दामाद श्याम महतो से 40 हजार रुपये लिये थे

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बीडीओ की कार्यप्रणाली को लेकर है नाराजगी

चान्हों प्रखंड के बीडीओ संतोष कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी है. न्यूज विंग से बातचीत करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि दर्जनों लाभुक विभिन्न तरह के काम को लेकर जब उनसे मिलते हैं तो उनका व्यवहार काफी उग्र होता है. इसी बात को लेकर सांसद प्रतिनिधि दीनानाथ मिश्र सहित कई ग्रामीण चान्हों प्रखंड परिसर में बीते एक हफ्ते से अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हुए हैं.

शनिवार को विधायक गंगोत्री कुजूर सहित अन्य अधिकारी प्रखंड कार्यालय पहुंचे थे जहां ग्रामीणों ने बताया कि कई लाभुकों ने खेत बंधक रख कर काम को पूरा किया है, लेकिन उन्हें पैसे का भुगतान नहीं किया जा रहा है. ग्रामीण बीडीओ संतोष कुमार के तबादले की बात कर रहे थे.

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