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बढ़ते पुलिस दबिश से बूढ़ा पहाड़ से भागा था मिथिलेश

Ranchi : भाकपा माओवादी के सेंट्रल कमेटी सदस्य मिथिलेश मेहता को शुक्रवार को पटना से गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार मिथिलेश मेहता बढ़ते पुलिस दबिश के वजह से बूढ़ा पहाड़ से फरार हुआ था. सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसकी खोजबीन में जुटी थीं. मिथिलेश मेहता उर्फ भिखारी उर्फ अभिषेक उर्फ गेहुदा मूल रूप से औरंगाबाद जिले के कुटुंबा क्षेत्र स्थित खैरा का निवासी है. झारखंड पुलिस मुख्यालय ने उसके खिलाफ एक करोड़ इनाम की राशि का प्रस्ताव भेजने की तैयारी की थी. झारखंड पुलिस इन दिनों करीब एक माह से लोहरदगा और लातेहार इलाके में लगातार अभियान चला रही है.

इसी दबिश से मिथिलेश मेहता बूढ़ा पहाड़ से निकल कर भाग गया था. झारखंड पुलिस और सेंट्रल एजेंसी की सूचना पर बिहार पुलिस की स्पेशल टीम ने मिथिलेश को पकड़ा है.

विमल यादव के समर्पण और बहेराटोली में पिकेट बनने से माओवादी खौफ में हैं. बहेराटोली में सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती रहती है. हालांकि मिथिलेश महतो की गिरफ्तारी की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है.

Sanjeevani

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कई माह से कर रहा था बूढ़ा पहाड़ पर कैंप

मिथिलेश वर्तमान में बूढ़ा पहाड़ इलाके में संगठन को मजबूत बनाने के लिए पिछले कई माह से कैंप रहा था. उसे बूढ़ा पहाड़ की जिम्मेवारी शीर्ष नक्सली अरविंद की मौत के बाद सौंपी गयी थी. मिथिलेश मेहता 2016 में पुलिस के हत्थे चढ़ा था. 2020 में जेल से निकलने के बाद दोबारा संगठन से जुड़ा. जनवरी 2021 बूढ़ा पहाड़ का इंचार्ज बनाया गया था.

बूढ़ा पहाड़ व छकरबंधा कॉरिडोर को सक्रिय करने की फिराक में मिथिलेश मेहता था. इसको लेकर तीन महीने पहले कोयल शंख जोन का नया कमांडर छोटू खेरवार को बनाया गया है. जानकारों के अनुसार, माओवादियों के सेंट्रल कमेटी सदस्य मिथिलेश मेहता के नेतृत्व में बैठक की गयी थी.

बैठक में नवीन यादव, छोटू खेरवार, नीरज सिंह खेरवार, मृत्युंजय भुइयां, रवींद्र गंझू, अमन गंझू समेत नक्सली शामिल हुए थे. इसी इलाके से माओवादी बिहार-झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ सीमा पर अपनी गतिविधि का संचालन करते हैं.

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अरविंद का था मेडिकल इंचार्ज

मिथिलेश मेहता उर्फ भिखारी बलरामपुर के सरहदी इलाके में जाना पहचाना नाम था. छत्तीसगढ़ में गिरफ्तारी के बाद उसे अंबिकापुर जेल में रखा गया था. फिर गढ़वा, पलामू व औरंगाबाद जेल में रहा. जेल से छूटने के बाद इसे फिलहाल अरविंद की जगह पर क्षेत्र की कमान सौंपी गयी थी.

2018 में 1 करोड़ के इनामी माओवादी देव कुमार सिंह उर्फ अरविंद की मौत के बाद सुधाकरण को बूढ़ा पहाड़ की कमान सौंपी थी. सुधाकरण के समर्पण के बाद भिखारी को कोयल शंख जोन और बूढ़ा पहाड़ की कमान सौंपी है.

मिथलेश उर्फ भिखारी माओवादी अरविंद का करीबी और मेडिकल इंचार्ज रहा है. मिथिलेश पर छत्तीसगढ़-झारखंड में कई बड़े नक्सली हमले करने का भी आरोप है.

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