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भूल गयी सरकारः न दिल्ली जैसी सुविधाएं मिलीं, न सभी गांवों में पहुंची बिजली

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Ranchi: झारखंड सरकार 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस समारोह मना रही है. इससे पहले के तीन वर्षों में भी यह समारोह बड़ी धूमधाम से मनाया गया था और उसकी पूर्वसंध्या पर कई घोषणाएं की गयी थीं. बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो की गयीं, लेकिन उनका हश्र क्या हुआ यह शायद सरकार को भी ठीक-ठीक पता नहीं. कुछ घोषणाएं तो ऐसी थीं जिनके पूरा होने की उम्मीद निकट भविष्य में नहीं.

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गांव के विकास पर खर्च होनी थी 60 फीसदी राशि

14 नवंबर 2015 को राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घोषणा की थी कि साल 2019 तक राजधानी रांची में दिल्ली जैसी सुविधाएं मिलने लगेंगी. अब दिल्ली जैसी सुविधा से उनका तात्पर्य क्या था, यह तो हमें नहीं मालूम, पर राजधानी में दिल्ली जैसी कोई भी सुविधा राजधानीवासियों को महसूस नहीं होती. एक और घोषणा पर गौर करें तो उन्होंने कहा था कि 10 वर्षों में झारखंड से कुपोषण मिटा दिया जायेगा और इसमें मोबाइल और आइटी का भी सहयोग लिया जायेगा. कुपोषण की हालत राज्य में जस की तस ही प्रतीत हो रही है. इसके अलावा उन्होंने कहा था कि अगले साल के बजट में 60 फीसदी राशि गरीबों और गांव के विकास के लिए रखी जायेगी. गांव और गरीबों की हालत में कोई खास फर्क नजर नहीं आता. सीएम ने घोषणा की थी कि चेक डैम का पैसा गांव के लोगों को खर्च करने के लिए दिया जायेगा. यदि ऐसा होता को चेक डैम योजना में गड़बड़ी की खबरें नहीं आतीं.

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गली-मुहल्लों की स्थित नारकीय

सबसे महत्वपूर्ण घोषणा उन्होंने यह की कि 2017 तक राज्य के सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी जायेगी. साल 2018 खत्म होने को है अब भी हजारों गांव अंधेरे में हैं. इसके अलावा उन्होंने घोषणा की थी कि नगर निगम को 200 पुलिसकर्मी दिये जायेंगे जो शहर को स्वच्छ रखने में उसे सहयोग करेंगे. ऐसा नहीं हुआ है. राजधानी की सिवरेज-ड्रेनेज योजना का शिलान्यास करते हुए उन्होंने घोषणा की थी कि यह काम दो साल में पूरा हो जायेगा. तीन साल से अधिक समय बीत चुका है काम पूरा नहीं हुआ है. साथ ही जिन इलाकों लाइन डाला गया है उन इलाके के गली-मुहल्लों की सड़कों की स्थिति इतनी दयनीय हो गयी है क पैदल चलना भी दूभर हो गया है.

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नहीं खत्म हुआ नक्सलवाद

14 नवंबर 2016 को मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि राज्य के पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए रांची में राष्ट्रीय स्तर का आवासीय स्कूल खुलेगा. अब तक ऐसे किसी स्कूल के खुलने की जानकारी नहीं आयी है. जैप वन ग्राउंड में परेड के दौरान राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने कहा था कि वर्ष 2017 तक नक्सलवाद खत्म हो जायेगा. अभी 2018 खत्म होने को है और हर दिन नक्सल गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं.

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नहीं मिला पुलिसकर्मियों को एक महीने का अतिरिक्त वेतन

14 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घोषणा की थी कि राज्य के पुलिसकर्मियों को एक महीने का अतिरिक्त वेतन जनवरी 2018 से दिया जायेगा. अब तक एक महीने का अतिरिक्त वेतन मिलना शुरू नहीं हुआ है. सीएम ने यह कहा है कि इस पर प्रगति जारी है और अगले साल तक यह मिलने लगेगा. इसके अलावा उन्होंने एसीबी कर्मियों को 25 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि देने की भी बात कही थी, जिसके मिलने की अब तक कोई सूचना नहीं है. सीएम ने कहा था कि रांची के बाद झारखंड के अन्य़ शहरों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे, पर अभी तक रांची में ही पूरी तरह यह कार्य नहीं कर रहा है. इसके अलावा उन्होंने घोषणा की थी कि 11 लाख परिवारों के लिए जल्द ही योजना लायी जायेगी. अब यह योजना किन परिवारों के लिए लायी गयी ये तो वे ही बता सकते हैं. 18 हजार अनाथ बच्चों को ट्रेनिंग देकर रोजगार से जोड़ने की घोषणा भी उन्होंने की थी, इस घोषणा के अमल की जानकारी अब तक सामने नहीं आ पायी है.

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