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मंत्री सरयू राय ने सीएम सह गृह मंत्री से पूछा- क्या अधिकारियों पर अदृश्य शक्ति की लगाम लगी हुई है, जो उन्हें कर्तव्य से विचलित कर रही है

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  • मानगो घटनाक्रम पर सरयू राय ने रघुवर दास को अंतिम प्रयत्न के रूप में लिखा पत्र, कहा- कार्रवाई नहीं होने पर खुद करेंगे वैधानिक कार्रवाई

Ranchi : खाद्य, आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री रघुवर दास को पत्र लिखा. पत्र में उन्होंने 14.5.2016 को मानगो में घटित आपराधिक कांड में जांच नहीं होने पर खेद प्रकट किया. अपने पत्र में राय ने लिखा है कि घटना की जांच के संबंध में उन्होंने कई बार पुलिस प्रशासन के वरीय अधिकारियों को पत्र लिखा, लेकिन अब तक इसका कोई नतीजा नहीं आया. भाजपा अध्यक्ष और संगठन महामंत्री ने भी पत्र के माध्यम से गृह मंत्री को सूचित किया, लेकिन तब भी कोई नतीजा नहीं निकला.  शासकीय अधिकारियों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी के नियम विरुद्ध निर्देश और दबाव देने से ऐसा होता. अधिकारियों के कार्यपालिका और भारतीय दंड संहिता के अनुरूप कर्तव्य नहीं मानने से ऐसा होता है.

मंत्री सरयू राय ने सीएम सह गृह मंत्री से पूछा- क्या अधिकारियों पर अदृश्य शक्ति की लगाम लगी हुई है, जो उन्हें कर्तव्य से विचलित कर रही है

मंत्री ने ये सवाल खड़े किये

पत्र में सवाल खड़े करते हुए राय ने कहा कि कानून और शासन के प्रति जिम्मेदार अधिकारियों का यह रवैया किस कारण से है, घटना की जांच नहीं करने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया गया है, क्या अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति सजग नहीं हैं, क्या अधिकारी बेलगाम हो गये हैं, जो उच्चाधिकारियों का निर्देश नहीं मानते, क्या उन पर किसी अदृश्य शक्ति की लगाम लगी हुई है, जो उन्हें कर्तव्य से विचलित कर रही है, क्या ये इस आपराधिक कांड को अंजाम देनेवालों के प्रभाव में हैं, क्या इस कांड में जमशेदपुर पुलिस ने दोषियों को बचाने और निर्दोषों को फंसाने की नीयत से फर्जी एफआईआर दायर की है?

मंत्री सरयू राय ने सीएम सह गृह मंत्री से पूछा- क्या अधिकारियों पर अदृश्य शक्ति की लगाम लगी हुई है, जो उन्हें कर्तव्य से विचलित कर रही है

मंत्री होने के नाते मेरे पत्र पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी

उन्होंने पत्र के माध्यम से चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कायदे से राज्य के मंत्री होने के नाते आला अधिकारियों को मेरे लिखे पत्र पर विधिसम्मत कार्रवाई करने की बाध्यता है. मुख्य सचिव और गृह मंत्री को पत्र का संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए थी. लेकिन, ऐसा हुआ नहीं. गृह मंत्री को आवश्यक प्रतीत होने पर ससमय मार्गदर्शन लेना चाहिए था. इससे प्रतीत होता है कि मेरे लिखे पत्र को गंभीरता से नहीं लिया गया.

अंतिम प्रयत्न की बात लिखी

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मंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि अंतिम प्रयत्न के रूप में पत्र लिखा जा रहा है. जब उन्हें किसी घटना की कार्रवाई के लिए इतनी परेशानी हो रही है, तो आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की क्या स्थिति होती होगी. उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर इस पर कार्रवाई नहीं की गयी, तो वह अपने स्तर से वैधानिक कार्रवाई करने के लिए अग्रसर होंगे. इस मामले को लंबा खींचने से प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है.

कार्रवाई न होना दुर्भाग्यपूर्ण

सरयू राय ने पत्र में लिखा है कि घटना के ढाई साल बीत जाने के बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. पुलिस मुख्यालय और पुलिस प्रशासन का निर्देश जिला अधिकारियों द्वारा नहीं मानना चिंता का विषय है.

यह है वह घटना, जिसकी जांच को लेकर रेस हैं मंत्री सरयू राय

घटना 14 मई 2016 की है. जेएमएम की ओर से स्थानीय नीति को लेकर झारखंड बंद बुलाया गया था. इसी बीच सुबह पांच बजे टाटा कंपनी की बस को जला दिया गया. पुलिस प्रशासन ने बस जलाने को लेकर जोगेंद्र सिंह निराला को सुबह पांच बजे गिरफ्तार किया. साथ ही, तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष पवन सिंह को पुलिस ने काफी ढूंढा. गिरफ्तारी के बाद जमशेदपुर स्थित एमजेएम अस्पताल में जोगेंद्र सिंह निराला और पवन सिंह को लगभग 18 दिनों तक रखा गया. किसी तरह मामले से निपटने के बाद दोनों ने खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय से मुलाकात की और बस जलाने की सीसीटीवी फुटेज मंत्री को सौंपी. उसके बाद से सरयू राय लगातार इस मामले में सक्रिय हैं.

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