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2022 तक किसानों की आय दोगुनी होने पर मंत्री रामेश्वर उरांव को नहीं ऐतबार, कहा- पूंजीपतियों की जेब भरने में लगी है केंद्र सरकार

Ranchi : राज्य भर में बुधवार से किसानों से धान क्रय की प्रक्रिया शुरू हो गयी. चौबीसों जिले में 562 सेंटरों के माध्यम से धान खरीद की जायेगी. धान अभिप्राप्ति की शुरुआत नामकुम प्रखण्ड (रांची) अन्तर्गत लैम्पस से वित्त सह खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने की. इस दौरान कृषि, पशुपालन, सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख सहित कई अधिकारी भी मौजूद थे. खरीफ विपणन मौसम 2021-22 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान अभिप्राप्ति की शुरुआत कार्यक्रम में रामेश्वर ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से किसानों के साथ खड़ी रही है.

इसके विपरीत भाजपा का साथ पूंजीपतियों को मिलता रहा है. देश में हरित क्रांति के बाद यह बात सामने आयी कि किसानों को उनकी उपज की उचित कीमत मिले. इसी कारण देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य की शुरुआत की गयी.

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भाजपा एमएसपी को समाप्त करना चाहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जायेगी पर यह संभव नहीं होगा.

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रामेश्वर उरांव ने जानकारी देते हुए कहा कि इस वर्ष किसानों से 8 लाख मीट्रिक टन धान क्रय का लक्ष्य रखा गया है. सरकार ने किसानों से 200 क्विंटल तक धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया है, इससे छोटे और मध्यम किसानों को लाभ मिलेगा.

अगर कोई किसान प्रमाणित करेगा कि उसने 1000 क्विंटल धान उपज किया है तो उसे भी एमएसपी का लाभ मिलेगा. पर इस योजना का लाभ व्यापारियों को नहीं दिया जायेगा.

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कॉपरेटिव आंदोलन देश में असफल

रामेश्वर उरांव ने कहा कि देश में कृषि के संबंध में यह कहावत दशकों से प्रचलित है कि भारत में कृषि मानसून के साथ जुआ है. वर्षा होगी तभी फसल होगी. वर्षा नहीं हुई तो संकट आयेगा. इसका एकमात्र रास्ता यही है कि देश में सिंचित कृषि क्षेत्र में वृद्धि की जाये. अभी झारखंड में सिर्फ 28 फीसदी कृषि योग्य भूमि ही सिंचित है.

72 प्रतिशत भूमि में सिंचाई सुविधाओं का अभाव है. देश में कॉपरेटिव आंदोलन भी असफल रहा है. इसे ठीक करने की जरूरत है. यह भी किवंदती है कि देश के किसान कर्ज में जन्म लेते हैं, कर्ज में जीते हैं और इसी में मर जाते हैं.

पर झारखंड सरकार किसानों को कर्जमाफी का लाभ दे रही. झारखंड सरकार ने तमाम परेशानियों और प्रतिकुल वित्तीय स्थिति के बावजूद किसानों का 50 हजार रुपये का कर्ज माफ करने का काम किया है.

अधिकांश किसानों को कर्ज माफी का लाभ मिल चुका है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य सभी किसानों को भी 50 हजार रुपये के ऊपर के कर्ज माफी का काम प्रारंभ किया जायेगा.

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खाद्य निगम कर रहा धान खरीद की मॉनिटरिंग

श्री बादल ने कहा कि पिछली सरकार के अंतिम दो वर्षों के कार्यकाल के विपरीत धान खरीद पर काम तेजी से आगे बढ़ा है. वर्ष 2017-18 में 40 लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य विपरीत मात्र 21 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई.

वर्ष 2018-19 में भी 40 लाख मीट्रिक टन के विपरीत सिर्फ 22 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हो सकी. हेमंत सरकार में कोरोना काल में 2019-20 में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 38 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई.

2020-21 में भी 60 लाख टन मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई. इस बार राज्य खाद्य निगम द्वारा धान खरीद की मॉनिटरिंग की जा रही है. साथ ही यार्ड बनाने और अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंचाने की कोशिश होगी.

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