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मंत्री रामेश्वर उरांव ने फिर अलापा बाहरी को ‘दोना देना कोना नहीं’ का राग, वैश्य महासम्मेलन ने जताया विरोध

Ranchi : एक बार फिर वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने बाहरी-भीतरी का राग अलापा है. पिछले दिनों मंगलवार को ओरमांझी (रांची) में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बाहरी को दोना देना, कोना नहीं. पूर्व में भी वे ऐसा ही बयान दे चुके हैं जिस पर विवाद हो चुका है. उनके द्वारा एक बार फिर से इसी बात को दोहराये जाने पर अंतराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन ने विरोध जताया है. महासम्मेलन के झारखंड प्रदेश के सचिव संजय पोद्दार ने मंत्री से झारखंड में बाहरी, भीतरी की परिभाषा स्पष्ट करने को कहा है.

उनसे बिहारी समाज से जुड़े लोगों से नफरत किये जाने का कारण पूछा है. गुरुवार को उन्होंने कहा कि मंत्रीजी बाहरी-भीतरी कर यहां के लोगों के बीच नफरत फैलाना चाहते हैं.

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मंत्री का बिहार से गहरा नाता

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संजय पोद्दार के मुताबिक वित्त मंत्री संभवतः बिहार से अपने नाते को भूल रहे हैं. शायद भूल गये हैं कि झारखंड अलग राज्य होने के पूर्व एकीकृत बिहार में ही इनकी शिक्षा दीक्षा हुई. इनके पास उपलब्ध सभी प्रमाण पत्र बिहार के ही होंगे.

बचपन बिताने से लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी बनने तक और फिर जनप्रतिनिधि, मंत्री बनने तक का आधा सफर तो बिहार में ही पूरा किया है. एकत्रित बिहार ने इन्हें पूर्ण मान सम्मान दिया. अब उसी बिहार के विरोध में मंत्रीजी ऐसा कह रहे हैं. पूर्व में भी वे ऐसी हरकत कर चुके हैं.

कांग्रेस पार्टी फूट डालो, राज करो की नीति पर काम कर रही है. एक तरफ कांग्रेस पूरे देश में संविधान की दुहाई दे रही है, वहीं मंत्री संविधान के खिलाफ बयान देकर लोगों में मतभेद पैदा कर रहे हैं.

मंत्री की कांग्रेस पार्टी में ही पहले से कई बाहरी लोग हैं और झारखंड में उनका कोना भी है. ऐसे में मंत्री को पहले अपने ही घर से सफाई शुरू करनी चाहिए.

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